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चंदन दास ने लखनऊ में गजलों से समां बांधा:भातखंडे विश्वविद्यालय में 'शाम-ए-गजल' का आयोजन

 

सत्यबंधु


भारत। लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में शनिवार को 'शाम-ए-गजल' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शांति सांस्कृतिक कला केंद्र और उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित इस महफिल में प्रसिद्ध गजल गायक चंदन दास ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं कों उत्साहित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संगीत, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का संदेश देना था।


समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और गायिका डॉ. शान्त्वना तिवारी के गजल संग्रह 'एहसास' का विमोचन भी किया गया। इसे साहित्य और संगीत के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। शांति सांस्कृतिक कला केंद्र द्वारा आयोजित गायन कार्यशाला के प्रतिभागियों ने भी गजलें प्रस्तुत कीं, जिनकी खूब सराहना हुई।


युवाओं को भारतीय संगीत से जोड़ने की आवश्यकता


चंदन दास ने अपने संबोधन में कहा कि गजल केवल गायन की विधा नहीं, बल्कि संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने युवाओं को भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। अन्य वक्ताओं ने भी भारतीय संस्कृति, संगीत और साहित्य के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।


कार्यक्रम में ये मौजूद रहे


इस अवसर उस्ताद गुलशन भारती, मिथिलेश लखनवी, आईएएस पार्थ सारथी सेन शर्मा, आईएएस हरि ओम, आईएएस मोनिका रानी और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, आईआरएएस अष्टानंद पाठक, प्रसिद्ध कॉमेडियन अन्नू अवस्थी सहित कई गणमान्य शामिल हुए ।