विटामिन B12: छोटा पोषक तत्व, जीवनशैली पर बड़ा प्रभाव
आज की स्वास्थ्य-केंद्रित दुनिया में हम प्रोटीन, प्रोबायोटिक्स और सुपरफूड्स की खूब चर्चा करते हैं—लेकिन एक ज़रूरी पोषक तत्व अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है: विटामिन B12। पर्दे के पीछे चुपचाप काम करते हुए यह विटामिन हमारी ऊर्जा बनाए रखने, दिमाग़ को चुस्त रखने और जीवनशैली को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाता है।
ऊर्जा देने वाला विटामिन, जिसकी ज़रूरत का आपको अंदाज़ा नहीं था
अगर आप अच्छा खाने और भरपूर नींद लेने के बावजूद अक्सर थकान महसूस करते हैं, तो संभव है कि विटामिन B12 की कमी इसकी वजह हो। यह शरीर को भोजन से ऊर्जा बनाने में मदद करता है और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाती हैं। जब B12 का स्तर घटता है, तो थकान जल्दी हावी हो सकती है—और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम भी भारी लगने लगते हैं।
मस्तिष्क, मूड और तंत्रिका स्वास्थ्य
विटामिन B12 मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन का महत्वपूर्ण सहायक है। यह नसों के चारों ओर मौजूद सुरक्षात्मक आवरण को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेशों का आदान-प्रदान सुचारु रूप से होता है। पर्याप्त मात्रा में B12 बेहतर स्मरण शक्ति, एकाग्रता और मूड संतुलन से जुड़ा है—जो आज के तनावपूर्ण जीवन में बेहद ज़रूरी है।
जहाँ जीवनशैली और पोषण का मिलन होता है
विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से दूध, अंडे, मछली और कम वसा वाले मांस जैसे पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। लेकिन बदलती खान-पान की आदतों के कारण कई लोग—ख़ासकर शाकाहारी और वीगन—इसे पर्याप्त मात्रा में नहीं ले पाते। अच्छी बात यह है कि फोर्टिफ़ाइड अनाज, पौधों से बने दूध और सप्लीमेंट्स के ज़रिये बिना अपनी जीवनशैली से समझौता किए दैनिक आवश्यकता पूरी की जा सकती है।
संकेत जो बताते हैं कि शरीर को और B12 चाहिए
विटामिन B12 की कमी हमेशा तेज़ी से सामने नहीं आती। लगातार थकान, हाथों या पैरों में झनझनाहट, त्वचा का पीला पड़ना, या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी—ये शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देना और समय पर सलाह लेना लंबे समय की जटिलताओं से बचा सकता है।
संतुलन बनाए रखने के आसान कदम
स्वस्थ B12 स्तर बनाए रखने के लिए बड़े बदलावों की ज़रूरत नहीं होती। संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जाँच और ज़रूरत पड़ने पर सप्लीमेंट लेना काफ़ी मददगार हो सकता है। कुछ लोगों के लिए—ख़ासकर बुज़ुर्गों में—उचित अवशोषण सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकीय सलाह आवश्यक हो सकती है।
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| अपर्णा श्रीवास्तव, आहार एवं पोषण विशेषज्ञ |


