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रील-वीडियो बनाने वालों की खुली किस्मत: बिहार में सरकारी योजनाओं के प्रचार पर मिलेंगे हर 1 लाख व्यूज पर ₹10,000; जानें क्या हैं शर्तें


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पटना (Patna News Desk)। बिहार में रील्स, शॉर्ट्स और वीडियो बनाने वाले डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 'बिहार सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन मीडिया (संशोधन) नियमावली, 2026' को मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति के तहत यदि कोई इन्फ्लुएंसर सरकार की विकास योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों और उपलब्धियों को लेकर वीडियो बनाता है, तो उसे वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर लाखों रुपये कमाने का मौका मिलेगा। [4, 5, 6, 7, 8]

हर 1 लाख व्यूज पर ₹10,000 का इंसेंटिव

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) के नियमों के तहत आने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को उनके वीडियो पर मिलने वाले व्यूज के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। वीडियो पोस्ट होने के 30 दिनों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद प्रति 1 लाख व्यूज पर 10,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। [9, 10, 11]

एक वीडियो पर अधिकतम ₹1 लाख की कमाई

सरकार ने इस योजना के तहत भुगतान की एक अधिकतम सीमा (कैपिंग) भी तय की है। किसी एक वीडियो के लिए अधिकतम भुगतान राशि 1 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती। इसका मतलब यह है कि यदि आपके किसी वीडियो पर 10 लाख या उससे अधिक व्यूज आते हैं, तो भी आपको उस वीडियो के लिए अधिकतम 1 लाख रुपये ही दिए जाएंगे। [6, 9]

क्या सच में सिर्फ 'गुड बुक' वालों को मिलेगा फायदा?

सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज है कि यह पैसा सिर्फ उन्हीं को मिलेगा जो सरकार की 'गुड बुक' (चहेतों की सूची) में हैं। प्रशासनिक तौर पर स्पष्ट किया गया है कि "गुड बुक" जैसी कोई अनौपचारिक चीज नहीं है। भुगतान केवल उन्हीं क्रिएटर्स को होगा जो बिहार सरकार के नियमों के तहत सूचीबद्ध (Empaneled/Registered) होंगे [2, 5, 12]
एम्पैनलमेंट (Empanelment) के लिए आवश्यक शर्तें:
सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए क्रिएटर्स को निम्नलिखित औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी:
  • फॉलोअर्स का वेरिफिकेशन: पंजीकृत सोशल मीडिया हैंडल, पेज या चैनल के फॉलोअर्स का नियमित सत्यापन किया जाएगा। [10]
  • दस्तावेज: आवेदक के पास वैध पंजीकरण विवरण, जीएसटी (GST) प्रमाणपत्र, पैन (PAN) कार्ड और बैंक खाते की जानकारी होनी चाहिए। [12]
  • एनालिटिक्स रिपोर्ट: क्रिएटर्स को आवेदन के साथ अपने प्लेटफॉर्म की पिछले 6 महीनों की परफॉर्मेंस और एनालिटिक्स रिपोर्ट जमा करनी होगी। [12]
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग जल्द ही इस संबंध में एक विस्तृत गाइडलाइन और अधिसूचना जारी करेगा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि कौन से प्लेटफॉर्म (जैसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि) इसके दायरे में आएंगे और व्यूज को सत्यापित करने का तरीका क्या होगा। [10, 12]