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कोविड के समय पर गरीबों का मसीहा कहे ,तो अतिशयोक्ति नहीं होगी , लखनऊ की वर्षा वर्मा जो शवों को पहुंचा रही है श्मशान घाट ,और कर रही है दाह संस्कार



सत्यबन्धु भारत

देश भर  में इस वक्त चारों तरफ संकट की घड़ी है , कोविड-19 ने  आतंक मचा रखा है| कोविड-19 ने  इंसानियत को पूरी तौर से शर्मसार किया है |इस समय पर कई लोगों ने अपनी जान गवा दी है |  ऐसे ही लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रही हैं वर्षा वर्मा , लोगों के लिए हमारे समाज में मसीहा बनकर काम कर रही हैं | इस महामारी ने पूरे पूरे परिवार को खत्म कर दिया और पूरे पूरे परिवार मौत के मुंह में चले गए | पिछले कई दिनों से वह कई शवों के दाह संस्कार कर चुकी हैं | यह काम वह अपनी इच्छा से करती हैं वर्षा जी ने गरीबों के लिए एक मुहिम की शुरुवात की और बिना किसी पैसे के शव वाहन भेजती हैं| वह कहती हैं कि यह काम करके उनको बहुत सुकून मिलता है |यह नेक काम वह अपनी मर्जी से करती हैं | इस नेक काम में उनके साथ उनके परिवार के लोग कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं| घर का पूरा सहयोग है |

कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार ही वह सारे काम कर रही हैं | सुबह से वह अपने काम में जुट जाती हैं उनके परिवार को उनका पूरा सहयोग मिल रहा है | उनके पति इंजीनियर है ,उनकी बेटी पढ़ रही है |  600 से अधिक लाशों का अंतिम संस्कार करवा चुकी हैं इस नेक काम में उनकी पूरी टीम उनके साथ काम करती है , और उनकी पूरी टीम पूरी शिद्दत से इस काम को अंजाम देती है | इस काम को कोई भी महिला तब तक नहीं कर सकती जब तक उसके घर का पूरा सहयोग ना मिल रहा हो उसको| वह किस्मती महिला है वर्षा वर्मा जी |इस पुण्य काम को दिल से करती हैं ,पूरी शिद्दत से करती हैं ,और उनकी टीम उनके साथ हर वक्त पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है|

वर्षा जी ने बताया उनको विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भी कॉल आते हैं ,जिनके मां-बाप हमारे शहर लखनऊ में रहते हैं |  उनकी आकस्मिक मौत हो जाती है फोन पर अनुरोध करते ही उनकी टीम पूरी जाकर पता करती है ,वह तुरंत ही शव वाहन भेजते हैं| वर्षा जी  उनकी मदद के लिए निकल पड़ती हैं|  उन्होंने बताया कि वह कई बार खुद ही मुखाग्नि देती हैं | उनके परिवार से मुखाग्नि देने के लिए वहां पर कोई नहीं होता इस नेक काम को वर्षा वर्मा जी ही करती हैं |इस वायरस का इतना खौफ है कि लोग शव को हाथ तक नहीं लगाते ,जैसा कि वह बताती हैं परिजन शव को छूते तक नहीं है| लेकिन वह यह कहती हैं तब बहुत बुरा लगता है | जब परिवार बाहर से निकल कर खड़ा होकर फोटो खींचता है, वीडियो बनाता है |  लेकिन शव  को हाथ नहीं लगाता | कोविड-19 वायरस से  परिवार चपेट में ना आ जाए इससे वह डरता है | भगवान नेक काम करने वालों के साथ खड़ा रहता है ,वर्षा जी का मानना है कि वह यह सारे काम समाज के लिए हमेशा करेगी |  गरीबों के पास पैसा भी नहीं होता और वह उस वक्त मसीहा की तरह उनके सामने आती हैं उनके सारे कामो  मे मदद करती हैं | उन परिवारों से या किसी दूसरे परिवारों से किसी भी काम का वह कोई चार्ज नहीं लेती | बस एक फोन कॉल पर वर्षा जी की टीम और उनका शव वाहन वहां पर पहुंच जाता हैं | वर्षा समाज  के लिए कई और तरह के काम भी करती हैं ,जैसे समाज में गरीब बच्चों के लिए खाना बांटना ,बच्चों के लिए पेंसिल बांटना किताबें बांटना गरीब बच्चों का एडमिशन कराना ,बच्चों को बहुत तरह की चीज देना , बच्चे जिन चीजों से महरुम रहते हैं|  उन गरीबों तक वह चीजें पहुंचाना आदि | बिना किसी स्वार्थ के जो लोग समाज के लिए काम करते हैं वह किसी ना किसी रूप में भगवान का अवतार होते हैं | वह मानव रूप में धरती पर|   अगर हम वर्षा जी को गरीबों का मसीहा कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।