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गुरुकुल से जनरेटिव एआई तक: विकसित भारत के लिए CSJMU के शोधकर्ताओं ने दिखाई नई राह

अशोक कुमार यादव 


कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के आजीवन शिक्षण एवं विस्तार विभाग तथा शिक्षा विभाग के शोधकर्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय को लेकर महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किया है। सहायक आचार्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा, डॉ. विमल सिंह के मार्गदर्शन में शोध छात्र अशोक कुमार यादव एवं सूरज गुप्ता का शोध पत्र “From Gurukul to Generative AI: Philosophical Foundations for AI-Enabled Multicultural Education” प्रकाशित हुआ है।

शोध पत्र में प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति और आधुनिक जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बीच संभावित समन्वय को ‘विकसित भारत’ की शैक्षिक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि एआई शिक्षा व्यवस्था को नई गति दे सकता है, लेकिन वह शिक्षक, मानवीय संवेदनाओं और मूल्य-आधारित शिक्षा का विकल्प नहीं हो सकता।

गुरुकुल के मूल्यों के साथ एआई का समन्वय

अध्ययन में बताया गया है कि यदि जनरेटिव एआई का उपयोग विचारपूर्वक, नैतिक और जिम्मेदार तरीके से किया जाए, तो यह कक्षा में संवाद, सहयोगात्मक चिंतन और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने में प्रभावी सहायक बन सकता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में तैयार किए गए मॉडल में गुरुकुल परंपरा के प्रमुख सिद्धांतों—गुरु-शिष्य संबंध, अनुभव आधारित शिक्षा, नैतिक मूल्यों, समग्र विकास और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता—को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

तकनीक के साथ मानवीय स्पर्श भी जरूरी

शोध में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद विद्यार्थियों के बौद्धिक, नैतिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास के लिए मानवीय स्पर्श और नैतिक मूल्यों की भूमिका बनी रहेगी।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एआई आधारित शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिसका लाभ अलग-अलग सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों तक समान रूप से पहुंचे। इससे कक्षाओं में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने, तकनीक के प्रति भय को कम करने और विद्यार्थियों में रचनात्मकता, संवाद क्षमता तथा लोकतांत्रिक नागरिकता की भावना विकसित करने में मदद मिल सकती है।

परंपरा और नवाचार के संतुलन पर जोर

शोधकर्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उज्ज्वल भविष्य परंपरा और आधुनिक नवाचार के बीच संतुलन स्थापित करने में है। जनरेटिव एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीक को यदि गुरुकुल की नैतिक और मानवीय जड़ों से जोड़ा जाए, तो अधिक समावेशी, संवेदनशील और समृद्ध शिक्षण वातावरण तैयार किया जा सकता है।

यह शोध भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ जोड़ते हुए विकसित भारत के लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की संभावनाओं को रेखांकित करता है, जिसमें तकनीक की शक्ति और मानवीय मूल्यों का संतुलन साथ-साथ कायम रहे।