सद्भावना समिति ने आयोजित किया ‘एक गीत, एक राष्ट्र—वन्दे मातरम् के 150 वर्ष’ कार्यक्रम, साहित्य, संगीत और काव्य ने बांधा समां
लखनऊ। राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवपूर्ण अवसर पर सद्भावना समिति की ओर से ‘एक गीत, एक राष्ट्र—वन्दे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर विशेष सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रप्रेम, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं लेखिका श्रीमती सरिता श्रीवास्तव रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथि कवयित्री श्रीमती रूपा पाण्डेय, कवि रामायण धर द्विवेदी, सुनील त्यागी, सुशील कुमार ‘बच्चा’ तथा हारून सिद्दीकी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया गया। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने ‘वन्दे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और वर्तमान पीढ़ी के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
वन्दे मातरम् केवल गीत नहीं, राष्ट्रचेतना का स्वर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में केवल एक गीत नहीं रहा, बल्कि यह मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, स्वाभिमान और राष्ट्रचेतना का सशक्त स्वर बना। इसकी 150 वर्षों की यात्रा भारतीय समाज की सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना की भी यात्रा है।
मुख्य अतिथि श्रीमती सरिता श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। वरिष्ठ समाजसेवी एवं लेखिका के रूप में उनके विचारों ने कार्यक्रम को साहित्यिक एवं सामाजिक दृष्टि से भी समृद्ध किया।
सुरों में गूंजा ‘वन्दे मातरम्’
कार्यक्रम में ‘वन्दे मातरम्’ गीत की विशेष प्रस्तुति ने वातावरण को राष्ट्रभावना से भर दिया। वीना त्यागी, कमल सक्सेना, रेणु सिंह, निशि मिश्रा, शशि, ऋचा द्विवेदी, शबीना, शालिनी सिंह, तोमोशा मुखर्जी एवं नीतू रावत ने सामूहिक रूप से अपनी प्रस्तुति दी।
कलाकारों की प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। सुरों और भावों के सुंदर संयोजन ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की।
कविता में जीवंत हुई राष्ट्रभक्ति
इसके बाद कवि रामायण धर द्विवेदी एवं कवयित्री रूपा पाण्डेय ने देशभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठ प्रस्तुत किया। ओज, संवेदना और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण उनकी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
काव्य पाठ के माध्यम से स्वतंत्रता संघर्ष, मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्र के गौरव को शब्दों में अभिव्यक्त किया गया। श्रोताओं ने दोनों साहित्यकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए जोरदार तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
आयोजकों के प्रयास की सराहना
कार्यक्रम के आयोजन के लिए सद्भावना समिति की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को देश के इतिहास, साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभावना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुनील त्यागी, सुशील कुमार ‘बच्चा’ और हारून सिद्दीकी सहित आयोजन से जुड़े सहयोगियों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति और सहयोगी टीम के प्रयासों की उपस्थित लोगों ने सराहना की।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि राष्ट्रप्रेम केवल नारों और गीतों तक सीमित न रहकर व्यवहार, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी में दिखाई देना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन संदेश
कार्यक्रम का मूल भाव यही रहा कि—
“वन्दे मातरम् की यात्रा 150 वर्षों की है, लेकिन मातृभूमि के प्रति उसका भाव हर भारतीय के हृदय में आज भी जीवंत है।”
वन्दे मातरम्। जय हिन्द।





