बाराबंकी के भानमऊ में जागरूकता शिविर, 120 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
बाराबंकी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और सतत आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), राज्य कार्यालय लखनऊ की ओर से ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत बीकीपिंग एवं हनी प्रोसेसिंग क्लस्टर, ग्राम भानमऊ, बाराबंकी में एक दिवसीय जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में करीब 120 लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में मधुमक्खी पालकों, किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के साथ गांव के गणमान्य एवं प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए। शिविर का उद्देश्य मधुमक्खी पालन को ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार और आय के प्रभावी साधन के रूप में बढ़ावा देना तथा आधुनिक मौन पालन, शहद उत्पादन, प्रोसेसिंग और बाजार में बिक्री की संभावनाओं की जानकारी देना रहा।
सरकारी योजनाओं और सहायता की दी जानकारी
कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, लखनऊ के कार्यकारी अधिकारी श्री ओम प्रकाश विश्वकर्मा ने ग्रामोद्योग विकास योजना तथा मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों और सरकारी सहायता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इच्छुक एवं पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क मौन बक्से भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
वहीं जिला उद्योग एवं उद्यमिता प्रोत्साहन केंद्र (DIC), बाराबंकी की सहायक उपायुक्त श्रीमती रूबी जामशेद ने उद्योग एवं कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं और सहायता के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।
खेती के साथ मधुमक्खी पालन से बढ़ सकती है आय
उद्यान विभाग के श्री अनिल शुक्ला ने कहा कि किसान पारंपरिक खेती और बागवानी के साथ मधुमक्खी के डिब्बे रखकर कम लागत में अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास अपनी कृषि भूमि नहीं है, वे भी उद्यान विभाग की ट्रेनिंग और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर मधुमक्खी पालन को व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं।
प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग से कई गुना बढ़ सकती है कमाई
कार्यक्रम में ग्रासरूट फाउंडेशन की सीईओ सुश्री अपर्णा मिश्रा ने मधुमक्खी पालन से आय बढ़ाने के व्यावसायिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक तरीके से शहद निकालकर बेच देना पर्याप्त नहीं है। यदि शहद की सही सफाई, प्रोसेसिंग, आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग की जाए तथा उसे बेहतर बाजार से जोड़ा जाए तो मधुमक्खी पालकों की आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बाजार में शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण शहद की मांग लगातार बनी हुई है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उत्पादित शहद को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाकर ग्रामीण समुदाय इसका आर्थिक लाभ उठा सकता है।
इनका रहा सराहनीय योगदान
कार्यक्रम के आयोजन में मो. वैश, श्रीमती शीला देवी, श्रीमती नीतू रावत, श्रीमती यासमीन बेगम, श्री पुनीत पाठक, श्री दिनेश तिवारी, श्री सुनील बाजपेई सहित अन्य लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
— ग्रासरूट फाउंडेशन, बाराबंकी



