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संघर्षों से निकली सफलता की राह: ग्वालियर की हेमू सैंथिया ने कविता से बदली जिंदगी



सत्यबंधु भारत। ग्वालियर (म.प्र.)।

कहते हैं जब जिंदगी हर मोड़ पर आपको रोकती है, तभी भीतर छुपी ताकत रास्ता बनाती है। ग्वालियर की हेमू सैंथिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां असफलताओं ने उन्हें तोड़ा जरूर, लेकिन खत्म नहीं कर पाईं।


सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहीं हेमू ने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन हर बार अंतिम चयन से महज 1-2 अंकों से चूक गईं। बार-बार की इस नाकामी ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया, लेकिन मां रमा सैंथिया ने उनका हौसला कभी टूटने नहीं दिया।


📌 शादी के बाद भी जारी रखा संघर्ष


समय के साथ उनकी शादी हुई, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोड़ा नहीं। इसी बीच बेटी अलंकृति का जन्म हुआ, जिसने उनकी जिंदगी में नई उम्मीदें भर दीं।


कुछ समय बाद उन्हें सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में स्थायी नौकरी मिली। दो साल सेवा करने के बाद अचानक उनका मन विचलित रहने लगा और उन्होंने नौकरी छोड़ दी।


💔 एंजाइटी ने तोड़ा, हिम्मत ने संभाला


घर पर रहते-रहते हेमू एंजाइटी की शिकार हो गईं। एक रात अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने के बाद उनका डर इतना बढ़ गया कि वे खुद को संभाल नहीं पा रहीं थीं।


कई डॉक्टरों से इलाज के बाद भी राहत नहीं मिली, लेकिन परिवार के सहयोग और फैमिली डॉक्टर की देखरेख में वे धीरे-धीरे इस स्थिति से बाहर आईं। इस वापसी में सबसे बड़ा योगदान हेमू अपनी सास मुन्नी कांकर का बताती है। 


✍️ कविता बनी नई जिंदगी का आधार


इसी दौरान बचपन की एक पंक्ति ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी “फंसे हैं बीच मझधार में, कैसे जाए उस पार,

हौंसला नहीं खोना, यही है इंसानों का सार।”




इसके बाद हेमू ने लिखना शुरू किया और महज एक महीने में उनकी कई कविताएं विभिन्न पुस्तकों में प्रकाशित हो गईं।


उनकी कविताएं “लेटर टू द मून”, “कलर्स ऑफ हर सोल”, “ग्लिम्स एंड ग्लूम्स” जैसी किताबों में जगह बना चुकी हैं।


🎤 रियलिटी शो में मां-बेटी का चयन


हेमू और उनकी बेटी अलंकृति का चयन


इंडिया टैलेंट फाइट


दूरदर्शन के शो “किसमें कितना है दम”



के मेगा ऑडिशन के लिए हो चुका है। अब दोनों के टीवी तक पहुंचने की उम्मीदें हैं।


🏅 खेल में भी रही अव्वल


हेमू सैंथिया खेल के क्षेत्र में भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने फेंसिंग (तलवारबाजी) में 3 नेशनल और 2 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और

👉 3 गोल्ड

👉 2 ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए।


🧠 कहती हैं—लिखना है मानसिक उपचार


हेमू के अनुसार, “कविता लिखने से मन हल्का होता है और नकारात्मक विचार बाहर निकल जाते हैं।”

वह लोगों से अपील करती हैं कि रोज कुछ समय किताबों और लेखन को दें, इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।


🙏 दुआओं की जरूरत

हेमू सैंथिया ने लोगों से अपील की है कि वे उन्हें और उनकी बेटी को आशीर्वाद दें ताकि वे मेगा ऑडिशन पार कर टीवी तक पहुंच सकें।