शाहाबाद, हाबाद। नगर में संचालित हो रहे बिना रजिस्ट्रेशन व मानक के स्कूल और मदरसे शिक्षा नीति को पलीता लगा रहे हैं। यहाँ गली मोहल्ले में ऐसे ही दर्जनों शिक्षा के हब बने हुये हैं। जो केंद्रीय शिक्षा नीति के बिल्कुल विपरीत हैं। इनमें तैनात शिक्षकों को मानक के अनुसार वेतन भी नही दिया जाता है। मामूली वेतन पर शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराने वाले स्कूल संचालक सारा खर्च बच्चों के अभिवावकों से लेते हैं।
नगर के एक व्यक्ति ने आरटीआई के माध्यम से संचालित स्कूलों की मान्यता सम्बन्धी दस्ताबेज बीईओ से मांगे गए थे। लेकिन बीईओ को मान्यता व मानक सम्बन्धी दस्तावेज नगर के कुछ स्कूल नही दे पाए। नगर के एक बहुचर्चित दक्ष इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के नाम से जाने जाना वाले स्कूल की कोई मान्यता नही है।सोमवार को बीईओ अनिल कुमार झा ने दक्ष इंटरनेशनल स्कूल का निरीक्षण भी किया। परन्तु कोई कार्यवाही नही की। बीईओ ने बताया कि सेंट जोसेफ के नाम से हरदोई में संचालित स्कूल की मान्यता है। उसी नाम पर यहां दक्ष इंटर नेशनल स्कूल चल रहा है। लेकिन कक्षा 10 तक चल रहे दक्ष स्कूल की मान्यता पर जबाब देने से कतराते हुए बीईओ अनिल झा ने कार्यालय आकर जानकारी की बात कही। नगर के तमाम लोगों ने ऐसे स्कूलों के संचालन में बीईओ अनिल कुमार झा की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। गांव हो या शहर ऐसे स्कूलों पर विभागीय अधिकारी हाथ डालने से बचते हैं। क्योंकि ऐसे स्कूल संचालकों से इन्हे हर माह सुविधा शुल्क मिलता रहता है। अभी कुछ दिन पूर्व योगी सरकार ने प्रदेश के मदरसों के सत्यापन उनके मानक,शिक्षण कार्य,शिक्षकों को वेतन,बच्चों की किताबों तथा बिल्डिंगों के मानक सत्यापित कर तय करने के निर्देश दिए थे। लेकिन बीईओ की खाउ-कमाऊ नीति के चलते सरकार का आदेश धरा रह गया। परिणाम स्वरूप तमाम ऐसे मदरसा चल रहे हैं जिनका कोई रिकार्ड नही है। फिर भी विभागीय अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नही जा रहा है। खास बात यह है कि बीईओ ने किसी भी मदरसे का अभी तक सत्यापन नही किया। बल्कि मदरसा संचालकों के मुताबिक रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी।

