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पारुल बन रही मंजीठा बेटियो की प्रेरणा, फैला रही शिंक्षा का प्रकाश



13 वर्ष की पारुल विगत 3वर्षों से गॉव में बेटियों के लिए निःशुल्क संचालित बेटियाँ केंद्र पर स्कूल से आकर 3:30 से 5:30 बजे तक नियमित स्वयं पढ़ने जाती है और अपने पास की परिषदीय स्कूल में कक्षा 1से5 तक पढ़ने वाली 10बेटियों को साथ ले जाती है। केंद्र पर बेटियों को पढ़ाती भी है। वह बताती है यहाँ कोई फीस नहीं ली जाती है,जरूरत की स्टेशनरी सामग्री भी मुफ्त दी जाती है। पारुल बताती है सुबह 5बंजे उठकर 6 बंजे तक रोज अपने घर की सड़क पर  अभी से दौड़ लगाने,पैदल चलने का अभ्यास करती है। प्रत्येक रविवार स्टेडियम भी जाती है।  6से 8बंजे तक घर के काम मे हाथ बटाती है,8बजे से सायं 6बंजे तक स्कूल व केंद्र फिर रात 8बंजे तक घर का काम करती है। उसके बाद अपनी पढ़ाई मे लगकर रात 10 बजे सोती है।



पारुल बताती है उसे  बालिकाओ में लक्ष्य परक शिंक्षा व उनके स्वास्थय अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने में बालिकाओ की आवाज सशक्त करने में रुचि है। आठवीं में गावँ के ही स्कूल में पढ़ती है पारुल। पारुल का सपना पुलिस अधिकारी बनकर समाज के लिए कुछ अलग करना है। ग्राम पंचायत मंजीठा के मजरे देवकहाँ की रहने वाली पारुल के पिता रूपेश टाईल्स लगाने का काम करते हैं।



पारुल के हौंसले को पंख लगाने में उनके मुंह बोले दादा जी  खादी और ग्रामोद्योग आयोग के  विकास अधिकारी पद से सेवा निवृत्त चन्द्र प्रकाश प्रोत्साहित कर मदद कर रहे हैं जो गावँ की बेटियों के लिए निःशुल्क  जागो-री-जागो आओ बनाएं शिक्षित व संस्कारित बेटियाँ केंद्र स्वयं की पेंशन राशि से संचालित कर रहे हैं।