शाश्वत चिकित्सा को लेकर बाबा का दावा—वैज्ञानिक शोध के लिए मेडिकल साइंस को खुला आमंत्रण, कार्यक्रम में स्पर्श आधारित उपचार भी बना चर्चा का विषय
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह ऑडिटोरियम, सहकारिता भवन, हजरतगंज में 6 सितंबर 2026 को आयोजित YOGACON-2026 राष्ट्रीय सेमिनार एवं अवॉर्ड फंक्शन में योग, प्राकृतिक चिकित्सा, शिक्षा और वेलनेस के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी चर्चा हुई। ऋषिकुल योगपीठ (Yoga & Naturopathy) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में बतौर अतिथि पहुंचे डॉ. स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश अपनी प्रस्तुति और विचारों के चलते खासे चर्चा में रहे। बाबा शाश्वत चिकित्सा के माध्यम से वेदों में वर्णित प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक समाज तक पहुंचाने का कार्य करने का दावा करते हैं।
अथर्ववेद की चिकित्सा विधाओं पर आधारित होने का दावा
बाबा भक्ति प्रकाश के अनुसार उनकी शाश्वत चिकित्सा पद्धति अथर्ववेद में वर्णित ऋषि अंगीरा की चिकित्सा परंपरा से संबंधित है। वे इस परंपरा की विभिन्न विधाओं का उल्लेख करते हुए दावा करते हैं कि शरीर के कुछ हिस्सों, जैसे घुटने, कंधे, पेट, सिर और कमर से संबंधित समस्याओं में स्पर्श के माध्यम से उपचार अथवा तत्काल राहत दी जा सकती है।
बाबा विभिन्न कार्यक्रमों में लोगों के सामने इस पद्धति का प्रदर्शन करते रहे हैं। उनके समर्थकों द्वारा ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं, जिनमें लोगों को तत्काल राहत मिलने का दावा किया जाता है।
हालांकि, इस तरह के उपचार संबंधी दावों की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने के लिए नियंत्रित चिकित्सकीय शोध और स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक हैं।
भगवा वस्त्र में पहुंचे बाबा, Anatomy और Physiology पर शुरू हुई चर्चा
कार्यक्रम में बाबा भक्ति प्रकाश जब भगवा वस्त्र में मंच पर पहुंचे तो उनका संबोधन आध्यात्मिक एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से शुरू हुआ। लेकिन जब उन्होंने Anatomy और Physiology से जुड़े विषयों को अंग्रेजी चिकित्सा शब्दावली के साथ समझाना शुरू किया तो सभागार में मौजूद लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई।
उन्होंने शरीर के विभिन्न अंगों की संरचना और उनके कार्यों को समझाते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और शरीर विज्ञान के बीच संबंधों पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने उनकी प्रस्तुति को लेकर कहा कि “बाबा ने कुछ मिनटों में एक सप्ताह की क्लास पढ़ा दी।”
कार्यक्रम के बाद लोगों ने कराया स्पर्श आधारित उपचार
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी बाबा के आसपास लोगों की भीड़ बनी रही। कई लोगों ने सिरदर्द, घुटने के दर्द और अन्य शारीरिक परेशानियों को लेकर उनसे संपर्क किया। बाबा ने अपनी बताई पद्धति के अनुसार लोगों को राहत देने का प्रयास किया।
इसी दौरान उनकी कार्यशैली और चिकित्सा पद्धति कार्यक्रम में चर्चा का प्रमुख विषय बनी रही।
मेडिकल साइंस को खुला आमंत्रण
बाबा भक्ति प्रकाश आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञों को अपनी पद्धति पर वैज्ञानिक शोध करने का खुला आमंत्रण देने की बात कहते हैं। उनका कहना है कि भारत के प्राचीन ग्रंथों में मौजूद ज्ञान का आधुनिक वैज्ञानिक कसौटियों पर अध्ययन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पारंपरिक ज्ञान में उपयोगी तथ्य मौजूद हैं तो शोध के माध्यम से उन्हें प्रमाणित कर आम लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए।
“वेदों में ज्ञान का खजाना है”
अपने संबोधन में बाबा ने कहा कि वेदों में ज्ञान का खजाना है और व्यक्ति थोड़ी सी जागरूकता के साथ अपने शरीर एवं स्वास्थ्य को बेहतर रखने की दिशा में प्रयास कर सकता है।
उन्होंने दिनचर्या और खानपान को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में स्वास्थ्य को लेकर कई ऐसे सूत्र मौजूद हैं, जिन पर दोबारा गंभीरता से विचार और शोध किए जाने की आवश्यकता है।
बाबा ने जोर देते हुए कहा कि वेदों में वर्णित ज्ञान पर सरकार और शोध संस्थानों को वैज्ञानिक अध्ययन कराना चाहिए, ताकि उपयोगी ज्ञान प्रमाण के साथ समाज तक पहुंच सके। उन्होंने अपने संदेश को उदाहरण के तौर पर रखते हुए कहा कि “जहां सुई से काम चल सकता है, वहां तलवार का उपयोग नहीं करना चाहिए।”
उत्तर प्रदेश विधानसभा और दिल्ली एम्स में प्रतिभा प्रदर्शन का दावा
डॉ. स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश के बारे में बताया गया कि वे उत्तर प्रदेश विधानसभा, दिल्ली एम्स सहित कई बड़े संस्थानों में अपनी प्रतिभा और चिकित्सा पद्धति का प्रदर्शन कर चुके हैं। उनके कार्यों के लिए उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मान एवं मानद उपाधियों से अलंकृत किए जाने की जानकारी भी दी गई।
अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मान
YOGACON-2026 के दौरान कार्यक्रम के अध्यक्ष देवनाथ शुक्ला द्वारा डॉ. स्वामी बाबा भक्ति प्रकाश को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
गौरतलब है कि YOGACON-2026 का आयोजन “शिक्षक सम्मान समारोह” की थीम के साथ किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को सम्मानित करना था। आयोजन 6 सितंबर 2026, रविवार को प्रातः 10 बजे सहकारिता भवन स्थित चौधरी चरण सिंह ऑडिटोरियम, हजरतगंज, लखनऊ में हुआ।
कार्यक्रम में बाबा भक्ति प्रकाश की मौजूदगी ने आयोजन को एक अलग आयाम दिया। वेदों के ज्ञान, आधुनिक Anatomy-Physiology और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति पर उनके दावों को लेकर वे पूरे कार्यक्रम में चर्चा के केंद्र में रहे।
YOGACON-2026 में बाबा भक्ति प्रकाश की चर्चा, Anatomy से वेदों तक समझाया शरीर का ज्ञान
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