लखनऊ। टिहरी जिले के पाख गांव निवासी योगाचार्य महेश सेमवाल को लखनऊ स्थित सहकारिता भवन में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में वैकल्पिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान डॉ. देवनाथ शुक्ला द्वारा प्रदान किया गया।
योगाचार्य महेश सेमवाल लंबे समय से योग, प्राणायाम, ध्यान और वैकल्पिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वस्थ एवं जागरूक करने के लिए कार्य कर रहे हैं। योग के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें इससे पहले भी जिला एवं राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। पिछले वर्ष उन्हें योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘योग रत्न’ सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।
योग एवं संस्कृत में हासिल की मास्टर डिग्री
महेश सेमवाल ने श्री जय राम संस्कृत महाविद्यालय, ऋषिकेश के योग विज्ञान विभाग से योग एवं संस्कृत में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने योग को जन-जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली का माध्यम बनाने पर विशेष जोर दिया।
100 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुधार के लिए किया मार्गदर्शन
योगाचार्य महेश सेमवाल ने विभिन्न योग शिविरों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक 100 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुधार की दिशा में मार्गदर्शन दिया है। उनका उद्देश्य योग एवं भारतीय जीवन पद्धति को आमजन तक पहुंचाना और लोगों को नियमित योगाभ्यास के लिए प्रेरित करना है।
उपासना योग केंद्र के माध्यम से निशुल्क शिविर
महेश सेमवाल का अपना संस्थान उपासना योग केंद्र, ग्रेटर नोएडा है। इसके माध्यम से वे समय-समय पर निशुल्क योग, प्राणायाम, ध्यान और आध्यात्मिक जागरूकता शिविर आयोजित करते रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के साथ स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में योग आधारित मार्गदर्शन
महेश सेमवाल के मार्गदर्शन में अनेक लोगों ने नियमित योगाभ्यास के माध्यम से अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव महसूस किए हैं। वे विशेष रूप से पीसीओडी/पीसीओएस, थायराइड, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कमर दर्द, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को योग आधारित जीवनशैली और अभ्यास के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
महेश सेमवाल अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गुरुजनों और योग के प्रति समर्पित साधना को देते हैं। उनका कहना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। उनका प्रयास है कि योग और भारतीय ज्ञान परंपरा का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

