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वास्तु, ज्योतिष और अंक विज्ञान: क्या घर बन सकता है आपकी किस्मत का कंट्रोल रूम?

 



सत्यबन्धु भारत/विशेष संवाददाता


लखनऊ। आज के दौर में जब लोग अपने सपनों का घर बनाने में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, तब भी कई बार जीवन में अपेक्षित सुख, शांति और समृद्धि नहीं मिल पाती। घर खूबसूरत होता है, डिजाइन शानदार होता है, लेकिन फिर भी कुछ अधूरापन बना रहता है। आखिर ऐसा क्यों?


इसी महत्वपूर्ण विषय पर एक विशेष पॉडकास्ट में इंटीरियर डिजाइनर, वास्तु विशेषज्ञ, ज्योतिषी और अंक ज्योतिष की जानकार नेहा सिंह ने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि “सिर्फ घर का सुंदर दिखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी दिशा, ऊर्जा संतुलन और उपयोग का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”


“सही” घर का मतलब क्या?


नेहा सिंह के अनुसार, “जब हम कहते हैं कि घर सही है, तो हमें समझना होगा कि हम किस आधार पर उसे सही कह रहे हैं। क्या वह केवल डिजाइन और सजावट के हिसाब से सही है या वास्तु के अनुसार भी संतुलित है?”


उन्होंने कहा कि कई बार घर देखने में परफेक्ट होता है, लेकिन जीवन में कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव नहीं लाता। ऐसे घर को भी एक तरह से “असंतुलित” माना जा सकता है।


दिशा और ऊर्जा का गहरा संबंध


विशेषज्ञ के मुताबिक, घर की एंट्रेंस, किचन, पूजा स्थल और सोने की दिशा व्यक्ति के करियर, आर्थिक स्थिति और मानसिक संतुलन पर प्रभाव डालती है।

“ये सिर्फ भौतिक चीजें नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा का प्रवाह तय करती हैं,” उन्होंने कहा।


वास्तु कोई जादू नहीं, एक सपोर्ट सिस्टम है


नेहा सिंह ने साफ किया कि वास्तु को जादू की तरह नहीं देखना चाहिए।

“वास्तु एक सप्लीमेंट की तरह है, जैसे शरीर में कमी होने पर हम विटामिन लेते हैं। यह आपकी ऊर्जा को संतुलित करता है और आपको बेहतर परिणाम पाने में मदद करता है,” उन्होंने समझाया।


बिना तोड़फोड़ भी संभव है सुधार


अक्सर लोगों को लगता है कि वास्तु सुधार का मतलब तोड़फोड़ है, लेकिन ऐसा हमेशा जरूरी नहीं।

उन्होंने बताया कि रंग, सामग्री, कमरे का उपयोग और दिशा के अनुसार बदलाव करके भी ऊर्जा संतुलन किया जा सकता है।


आम गलतियां जो लोग करते हैं


विशेषज्ञ ने कुछ सामान्य गलतियों की ओर भी ध्यान दिलाया:


गलत दिशा में शीशा लगाना


घर में रंगों का असंतुलन


पानी और अग्नि तत्व का गलत स्थान


बिना जानकारी के डिजाइन कॉपी करना


उन्होंने सलाह दी कि “थोड़ी सी बेसिक जानकारी लेकर भी व्यक्ति अपने घर में बड़ा बदलाव ला सकता है।”


शीशा और घड़ी की दिशा भी अहम


नेहा सिंह के अनुसार, शीशा और दीवार घड़ी को उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम दिशा में इनका प्रभाव कमजोर होता है।


किचन, मंदिर और बेडरूम का महत्व


किचन के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सर्वोत्तम मानी जाती है


मंदिर के लिए दिशा से ज्यादा आस्था महत्वपूर्ण है


सोते समय सिर दक्षिण दिशा में रखना बेहतर माना गया है


अंक ज्योतिष और मकान नंबर का प्रभाव


उन्होंने बताया कि मकान का नंबर भी व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डाल सकता है।

“हर अंक का अपना स्वभाव होता है। अगर मकान नंबर आपके मूलांक या भाग्यांक के अनुकूल हो, तो सकारात्मक परिणाम मिलते हैं,” उन्होंने कहा।


विज्ञान और आस्था का संतुलन


वास्तु और ज्योतिष को अंधविश्वास मानने वालों पर उन्होंने कहा,

“यह पूरी तरह विज्ञान से जुड़ा है। जैसे चंद्रमा का प्रभाव समुद्र के ज्वार-भाटे पर पड़ता है, वैसे ही मानव शरीर पर भी पड़ता है। हमारा शरीर भी 70-80% पानी से बना है।”


निष्कर्ष


नेहा सिंह का मानना है कि घर सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक ऊर्जा केंद्र है।

अगर इसे सही तरीके से समझकर बनाया जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।


“घर आपका कंट्रोल रूम है, जहां से आपकी जिंदगी की दिशा तय होती है,” उन्होंने अंत में कहा।