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बीमारियों को न्योता देती जीवनशैली पर बड़ा सवाल, विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टर की फीस या योग की आदत?



सत्यबन्धु भारत। विशेष रिपोर्ट

“बीमारी अचानक नहीं आती, हम उसे बुलाते हैं।”

आज की बदलती जीवनशैली में यह कथन एक सच्चाई बन चुका है। छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी लोग सीधे डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं और तत्काल राहत को ही समाधान मान रहे हैं। लेकिन योग गुरु अनुपमा इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति मानती हैं।

उनका कहना है कि अधिकांश बीमारियां अचानक नहीं होतीं, बल्कि हमारी गलत आदतों का परिणाम होती हैं। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है।

योगगुरु अनुपम के अनुसार, “जो शरीर को समय नहीं देता, शरीर उसे बीमारी के रूप में समय देता है।” योग को वे जीवनशैली का आवश्यक हिस्सा बताते हैं, जो न केवल शरीर बल्कि मन और आत्मा को भी संतुलित करता है।

समाज में एक धारणा है कि योग करने से उतने ही दिन लाभ मिलता है, जितने दिन इसे किया जाए। विशेषज्ञ इस सोच को गलत बताते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार व्यक्ति रोजाना भोजन करता है और दैनिक कार्य करता है, उसी प्रकार योग भी नियमित होना चाहिए।

अनुपम के अनुसार, हमारे शरीर में ही सबसे बड़ा डॉक्टर इम्युनिटी सिस्टम और सबसे बड़ा मेडिकल स्टोर हार्मोनल सिस्टम मौजूद हैं, जो हमें बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन यदि जीवनशैली असंतुलित हो, तो ये प्रणालियां कमजोर पड़ जाती हैं। योग इन आंतरिक प्रणालियों को मजबूत करने का कार्य करता है।

महिलाओं में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। PCOD, PCOS, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन और तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अनुपमा का कहना है कि एक स्वस्थ महिला ही परिवार की मजबूत नींव होती है, इसलिए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए।

प्रदूषण, मिलावटी भोजन और तनाव जैसे आधुनिक खतरे शरीर को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में योग को शरीर की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि केवल सोशल मीडिया के माध्यम से योग सीखना जोखिमभरा हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए प्रशिक्षित योग गुरु के मार्गदर्शन में ही योग करना चाहिए।

व्यस्त जीवनशैली के बावजूद विशेषज्ञ रोजाना 10 से 15 मिनट सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि “आज का पसीना, कल की दवा बचाता है।”

अंततः योग गुरु अनुपम का स्पष्ट मत है कि डॉक्टर इलाज करते हैं, लेकिन योग बचाव करता है। समय रहते योग को जीवनशैली में शामिल करना ही बेहतर स्वास्थ्य का मार्ग है।