पाणिनी संहिता में लिखा है -
पुष्य सिद्धौ नक्षत्रे सिध्यन्ति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि सिध्यः।
पुष्यन्ति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि इति पुष्य।
अर्थात– पुष्य नक्षत्र में शुरू किए गए सभी कार्य पुष्टि दायक, सर्वार्थसिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं। सभी नक्षत्रों का राजा कहे जाने वाले पुष्य नक्षत्र का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. शुभ कार्यों और खास चीजों की खरीदारी के लिए पुष्य नक्षत्र का दिन बहुत शुभ माना जाता है। पुष्य को नक्षत्रों का राजा भी कहते हैं। माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र की साक्षी से किए गए कार्य हमेशा सफल होते हैं।
वेदों में पुष्य–
पुष्य को ऋग्वेद में तिष्य अर्थात शुभ या मांगलिक तारा कहते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार गाय के थन को पुष्य नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है तथा ये प्रतीक चिन्ह भी हमें पुष्य नक्षत्र के स्वभाव के बारे में बहुत कुछ बताता है। गाय को भारतवर्ष में प्राचीन तथा वैदिक काल से ही पूज्या माना जाता है तथा गाय के दूध की तुलना वैदिक संस्कृति में अमृत के साथ की जाती थी। पुष्य नक्षत्र गाय के थन से निकले ताजे दूध जैसा पोषणकारी, लाभप्रद व देह और मन को प्रसन्नता देने वाला होता है। इसलिए ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगल कर्ता, वृद्धि कर्ता और सुख समृद्धि देने वाला भी कहा गया है।
आयुर्वेद के अनुसार हर पुष्य नक्षत्र तिथि में शून्य से 16 वर्ष के बच्चों को *स्वर्ण प्राशन* कराना लाभदायक बताया गया है। सुवर्णप्राशन बच्चों के लिए एक अनोखा एवं सर्वोत्तम स्वास्थ्य टॉनिक है। प्राचीन काल में महर्षि कश्यप ने सर्वांगीण कल्याण और संतान के विकास के लिए इस अनूठे संयोग का वर्णन किया था। और जब *पुष्य नक्षत्र में सुवर्णप्राशन* दिया जाता है तो वह सर्वोत्तम हो जाता है। यह औषधि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, श्वसन संबंधी एवं अन्य रोगों से रक्षा करने के साथ ही एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने में अत्यंत लाभकारी है। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करता है।
स्वर्ण प्राशन क्या है?
स्वर्ण प्राशन दो शब्दों से बना है - "स्वर्ण" जिसका अर्थ है उत्तम धातु सोना, और "प्राशन" जिसका अर्थ है उपभोग करना, ग्रहण करना या खाना। स्वर्ण प्राशन ड्रॉप्स प्रतिरक्षा बढ़ाने, विकास को बढ़ावा देने, पाचन में सुधार और बच्चे में विकास, स्मृति, बुद्धि और शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध हैं। बच्चों को शुद्ध सोने की भस्म देना एक सदियों पुरानी आयुर्वेदिक पद्धति है। स्वर्ण प्राशन स्वर्ण भस्म या शुद्ध सोने की भस्म को मधु या शहद और ब्राह्मी घृत या घी के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। ब्राह्मी घृत में निर्धारित मात्रा में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अमलतास, दंतीमूल, शिखाकाई, मारियाच, वायविडंग, पिपाली, निशोथ कैल, सोंठ और निशोथ सफेद जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का मिश्रण शामिल है।
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स्वर्ण प्राशन के फायदे–
0 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों को उनकी बुद्धि, पाचन, चयापचय, शारीरिक शक्ति और प्रतिरक्षा में सुधार के लिए स्वर्ण प्राशन ड्रॉप्स दी जा सकती हैं। आयुर्वेद शास्त्रों में बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन के निम्नलिखित लाभों पर प्रकाश डाला गया है:
मेधा - बुद्धि को बेहतर बनाती है
अग्नि - पाचन और चयापचय को बढ़ाता है
बाला - शक्ति और प्रतिरक्षा बनाता है
आयुष - स्वस्थ दीर्घायु जीवन
मंगलम् - शुभ माना जाता है
पुण्यम् - पुण्यदायी माना जाता है
वृष्यम् - एक कामोत्तेजक
वर्ण्य - रंगत निखारता है
ग्रहापहम - सभी ग्रहों के बुरे प्रभाव को समाप्त करता है
पुष्य को अधिकांश शुभ कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए इसे शुभ मुहूर्त समय में शामिल किया गया है। पुष्य नक्षत्र हर माह में एक बार आता है।
पुष्य नक्षत्र तिथि–
14 अगस्त 2023
सोमवार
प्रारंभ सुबह : 11:07, अगस्त/14/23
अंत दोपहर: 01:59, अगस्त/15/23
हरी ओम तत् सत्
प्रेम एवं आभार
दिशा संधू

