मिसाल
। संतोष कुमार ।
मैनपुरी। न दोनों पैर, न दायां हाथ और बाएं हाथ की दो अंगुलियां। केवल तीन अंगुलियां ही उनका सहारा थीं। बावजूद इसके मैनपुरी के सूरज तिवारी देश की सबसे प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक परीक्षा में किसी सितारे की तरह चमके। एक समय डिप्रेशन के शिकार हो चुके दर्जी पिता की संतान सूरज ने अपने हौसलों और जिद से नया प्रतिमान गढ़ा है।
कुरावली कस्बे के सूरज को यूपीएससी की परीक्षा में 917वीं रैंक हासिल हुई है। उनकी कहानी किसी को भी आगे बढ़ने का हौसला दे सकती है। यहां के रहने वाले राजेश तिवारी पेशे से दर्जी हैं। सूरज तिवारी उनके छोटे पुत्र हैं। 29 जनवरी 2017 को सूरज के बड़े भाई राहुल ने जान दी तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार हादसे से उबरने की कोशिश कर ही रहा था कि 27 मई 2017 को सूरज के साथ हुए भीषण ट्रेन हादसे ने पूरे परिवार की उम्मीदों को
यूपी बोर्ड से पास किया इंटरमीडिएट
रोचक बात ये भी है कि 2013 में सीबीएसई इंटर की परीक्षा में सूरज फेल हो गए तो 2014 में उन्होंने यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट पास किया। सूरज बताते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा पास करने की खुशी है। वे युवाओं से कहना चाहते हैं कि पढ़ाई के लिए घंटों की जरूरत नहीं होती, सिर्फ जिद और जुनून पैदा कीजिए।
तोड़ दिया। दिल्ली से घर आते समय बादलपुर रेलवे स्टेशन पर भीड़ के दबाब में उनका पैर फिसला तो वह ट्रेन की चपेट में आ गए और उनके दोनों पैर, दायां हाथ और बाएं हाथ की अंगुलियां कट गईं।



