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मनीष गुप्ता हत्याकांड में केवल तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक पर चलेगा हत्या का मुकदमा, CBI कोर्ट ने तय किए आरोप

मनीष गुप्ता (फ़ाइल फोटो) 
सीबीआइ की विशेष कोर्ट ने सभी अभियुक्तों पर आरोप तय किए हैं। अक्षय मिश्रा समेत पांच पुलिसकर्मियों पर साक्ष्य मिटाने मारपीट बलवा के आरोप तय किए गए हैं। आरोपित अक्षय कुमार मिश्र विजय यादव राहुल दूबे एवं कमलेश सिंह द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत उन्मोचन प्रार्थना पत्र निरस्त किया है।

गोरखपुर, कानुपर के कारोबारी मनीष गुप्ता हत्याकांड में रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन प्रभारी जगत नारायण सिंह पर ही केवल हत्या के आरोप में विचारण होगा। सीबीआइ कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विजय कुमार झा ने आरोपित बनाए गए अक्षय मिश्रा समेत अन्य पुलिसकर्मियों को साक्ष्य मिटाने, मारपीट, धमकी देने का आरोपित माना है। जिन धाराओं में अभियुक्तों पर आरोप तय हुआ है उसी में विचारण होगा।

सीबीआई न्यायालय में दाखिल उन्मोचन प्रार्थना पत्र निरस्त

हत्या के मामले में आरोपितों की ओर से सीबीआई न्यायालय में दाखिल उन्मोचन प्रार्थना पत्र (डिस्चार्ज एप्लिकेशन) को विशेष न्यायाधीश विजय कुमार झा ने निरस्त कर दिया है। आरोपित अक्षय कुमार मिश्र, विजय यादव, राहुल दूबे एवं कमलेश सिंह ने न्यायालय के समक्ष उन्मोचन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। विशेष न्यायाधीश ने प्रार्थना पत्र को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए जगत नारायण सिंह के विरुद्ध हत्या कर साक्ष्य मिटाने व अन्य आरोपितों के विरुद्ध समान आशय से मारपीट करने एवं साक्ष्य मिटाने का आरोप तय किया है। न्यायालय द्वारा होटल कृष्णा पैलेस में पुलिस वालों के इकट्ठा होने को विधि विरुद्ध जमाव नहीं माना गया, क्योंकि पुलिस द्वारा अपनी विवेचना में यह तथ्य लाया गया है कि दिनांक 27 सितंबर 2021 को तत्कालीन पुलिस कप्तान द्वारा होटलों की चेकिंग करने के निर्देश दिए गए थे, जिस क्रम में पुलिस वाले होटल में गए थे। यह है मामला


27 सितंबर 2021 को कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता अपने दो दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने के लिए आए थे। तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस में रात में पुलिस मनीष व उनके दोस्तों की पिटाई कर दी थी। इससे मनीष की मौत हो गई थी। दूसरे दिन मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर पुलिस ने हत्यारोपित निरीक्षक जगत नारायण सिंह सहित छह पुलिस कर्मियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा पंजीकृत किया था। इसकी विवेचना पहले कानपुर एसआइटी ने की। एक माह बाद यह जांच सीबीआइ को दे दी गई। जनवरी 2022 के पहले सप्ताह में सीबीआइ ने विवेचना पूरी कर दिल्ली की विशेष सीबीआइ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। जिसके बाद गोरखपुर जेल में निरुद्ध आरोपित पुलिसकर्मियों को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया।