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सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर है डरावनी



सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल,जिम्मेदार मौन

घोर लापरवाही, के बाद भी आलाधिकारी मौन

दोपहर के एमडीएम को तरस रहें बरीपूर् विद्यालय के बच्चे



अझुवा कौशाम्बी, क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था किसी से छुपी नहीं है सरकार हमेशा शिक्षा में सुधार के दावे करती नजर आती है लेकिन सच्चाई इन दावों को आइना दिखा रही है प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे अधिकतर गरीब मजदूर परिवार से ही आते हैं स्कूल मध्यान भोजन, गणवेश छात्रवृत्ति सहित अन्य तमाम योजनाओं के माध्यम से बच्चों को विद्यालय की ओर खींचने की कोशिश की जा रही है लेकिन वह शिक्षा के असल उद्देश्य यानी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के मामले में पूरी तरह नाकाम होते दिख रही ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इसका बड़ा कारण इस व्यवस्था की रीढ़ शिक्षकों की अनदेखी है शिक्षक विद्यालय में समय से पठन-पाठन के लिए मौजूद नहीं रहते सरकार का गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संचालन कागजों पर भले ही लाख दावे कर ले लेकिन इसकी जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है।


आइए बात करते हैं सिराथू ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बरीपूर की यहां के प्रधानाध्यापक और शिक्षक बड़े ताना शाह है ये विद्यालय कभी आते है कभी नही आते मतलब जब इनकी मर्जी होती है तभी विद्यालय आते हैं मंगलवार 11 बजे तक एक भी शिक्षक विद्यालय नही पहुंचे थे विद्यालय गेट पर ताला लगा था बाहर तमाम बच्चे खड़े होकर ताला खुलने और शिक्षको के आने का इंतजार कर रहे थे मौजूद बच्चों ने बताया यहाँ मध्यान्ह भोजन जब प्रधानचार्य का मन होता है तभी बनता है पिछले 2 दिनों से मध्यान्ह भोजन नही बना है दूध और फल तो मास्टर जी के रजिस्टर में बनता होगा आज तक कभी फल फ्रूड तो मिला ही नही दूध जब बड़े सर जी का मन हो जाता है तो मिलावटी दूध मिल जाता है।आर्थिक रूप से पिछड़े गरीब वर्ग के अभिभावकों ने तानाशाह प्रधानाध्यपाक संजीव कुमार सिंह की जिलाधिकारी से जांच कर कार्रवाई की मांग की है।