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पंच महाभूतों से ही जीवन का अस्तित्व : अतुल कोठारी



सनातन की पद्धतियों को आत्मसात करने की जरुरत: महामंडलेश्वर

कुलपति प्रो.डी.के. शर्मा को मिले ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2022

अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, बांग्लादेश सहित देश-विदेश से जुटे सैकड़ों शिक्षाविद

ब्राउस में ‘सस्टनेबल डेवलपमेंट : पंच महाभूत फॉर इनवायरमेंट एंड सोशल हार्मोनी’ विषय पर तीन दिवसीय अंतररष्ट्रीय कांफ्रेंस का उद्घाटन 



महू। पर्यावरण चिंतन वर्तमान की अपरिहार्यता है. समूचे शैक्षिक दर्शन में भारतीय दृष्टि को सैद्धांतिक नहीं बल्कि विचारों में उतारना आवश्यक है. सदियों से पंच महाभूतों से ही मानव समाज में जीवनधारा रही है. उसे अपने जीवन में आत्मसात के लिए पाठ्यक्रम में भारतीय दृष्टि को पढ़ाया जाना आवश्यक है। 

उक्त बातें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी बतौर मुख्य अतिथि यूजीसी स्ट्राइड परियोजना कंपोनेंट-I के अंतर्गत ‘सस्टनेबल डेवलपमेंट : पंच महाभूत फॉर इनवायरमेंट एंड सोशल हार्मोनी’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतररष्ट्रीय कांफ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन एवं पुरस्कार वितरण सत्र के अवसर पर कही. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पांजलि एवं कुलगीत से किया गया तथा समापन राष्ट्रगान से हुआ। अतिथियों को शाल, स्मृति चिन्ह तथा पौधा देकर स्वागत किया गया।


अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेस में पर्यावरण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले पर्यावरणविदों को  ‘जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया’, सोसाइटी ऑफ लाइफ साइंस एवं माँ अनंता अभ्युदय सामाजिक सेवा संस्था द्वारा पुरस्कार प्रदान किये गए. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.के.शर्मा को जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया तथा सोसाइटी ऑफ लाइफ साइंस से अलग-अलग दो ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2022 प्रदान किया गया। प्रो.अनीश सिद्दीकी, प्रो. लीना लखानी, प्रो. एम.एम.पी.श्रीवास्तव को भी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया.  एवं माँ अनंता अभ्युदय सामाजिक सेवा संस्था द्वारा विश्वविद्यालय को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया. साथ ही शासकीय माधव विज्ञान कालेज एवं आदर्श इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस को भी सम्मानित किया गया। बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड पाने वाले में डॉ. विक्रम आर्य, डॉ. विनय कुमार चक्रवर्ती बांग्लादेश, डॉ. विजय प्रकाश सेमवाल रिकग्निशन अवार्ड डॉ विनय द्विवेदी, प्रो. शैलेंद्र शर्मा को प्रो. बाबा जाधव सीनियर साइंटिस्ट अवार्ड, यंग साइंटिस्ट अवार्ड पाने वाले डॉ. माता दीन भारती, डॉ. राशिद हारून, डॉ. प्रियंका मिश्र रहे. पुरस्कार पाने वालों में प्रो. डी.के. वर्मा प्रो. वी.एस.चौहान, डॉ. सुमन मिश्रा, डॉ. राजेन्द्र मिस्त्री, डॉ. सोना दुबे, डॉ. जी. समित्ता, महामंडलेश्वर नरसिंह दास, डॉ ज्योति प्रकाश, डॉ. प्रीति पाटीदार रहे।


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अतुल कोठारी ने पर्यावरण चिंतन को सनातन एवं वैदिक परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि हम क्या थे, क्या हैं और क्या होंगे पर चिंतन की आवश्यकता है। सनातन परम्परा में पंच महाभूत को संरक्षित करना सिखाया जाता रहा है. सृष्टि को खंडित रूप में देखने का दृष्टिकोण ख़त्म होना चाहिए। पंडित दीन दयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन में प्रकृति को एकाग्रता में देखने का नजरिया प्रस्तुत किया गया है. पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए स्वयं को परिमार्जित करना अत्यंत जरुरी है। महामंडलेश्वर डॉ. नरसिंह दास ने कहा कि भारत विश्वगुरु था, विश्वगुरु है और विश्वगुरु रहेगा। सनातन परम्पराओं में बहुत पहले से ही प्रकृतिपूजक रहे हैं. पर्यावरण को संरक्षित रखना है, इसलिए सनातन ऋषियों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व से ही पंच महाभूत देवताओं की तरह पूजे जाते रहे हैं. महर्षि भारद्वाज का विमान निर्माण विधि शास्त्रों में वर्णित है. उन्नत शिक्षा, शास्त्र तथा मन्त्रों के अनुसंधान से ही विकसित राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है।


डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.के. शर्मा ने स्वागत एवं अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि सनातन परंपरा में पर्यावरण संरक्षण को भविष्यगामी आधारभूत आवश्यकता के रूप में देखा गया जिससे  पंच महाभूत को उपासना में शामिल किया गया. पुनः सनातन की पद्धतियों को आत्मसात करने की जरुरत है. विश्वविद्यालय निरंतर पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहा है। प्रो. बी.एन. पांडेय ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर का जीवन दर्शन एवं विचार संकल्पित जीवन जीने को प्रेरित करता है. पूरा विश्व पर्यावरणीय समस्याओं से जूझ रहा है. इसका समाधान सनातन जीवन प्रणाली में मौजूद है. विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षा संस्कृति न्यास के ओम जी शर्मा कहा कि पर्यावरण संरक्षित करने की शुरुआत स्वयं से करनी होगी. जनजाति क्षेत्रों के लोग कम संसाधनों में जीवन यापन कर पंच महाभूतों को आत्मसात करते हैं।  


महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के चेयरपर्सन डॉ. भरत बैरागी ने कहा कि विश्व जिस बात कि चिंता कर रहा है उसका हल वैदिक ज्ञान में तलाशना होगा. भारत की सनातन परंपरा सर्वे भवन्तु सुखिनः की संवाहक है. यम नियम संयम से ही समस्याओं का निदान संभव है. समरस भारत के निर्माण से विश्व का मार्ग प्रशस्त कर पाएंगे।


पर्यावरणविद प्रो. डी.के. बेलसरे ने वैदिक संस्कृति पर अनुसंधान करने वाले अध्येताओं का जिक्र करते हुए कहा कि सनातन व्यवस्था में पंच महाभूतों को संरक्षित करने की बात कही है. एक व्यवस्थित चिंतन से उन पद्धति को वर्तमान समय में लागू कर सकते है. यह सब शिक्षा में भारतीय दृष्टि से संभव हो सकता है।


विशिष्ट अतिथि जर्मनी के प्रो. उलरिच बर्क ने पर्यावरण के बारे में कहा कि अखिल ब्रह्मांड में जलवायु परिवर्तन हो रहा है. पर्यावरण के अकुशल प्रबंधन से पृथ्वी लगातार प्रदूषित हो रही है. जिससे मानव जीवन पर इसका प्रतिकूत प्रभाव पड़ रहा है। वैदिक पद्धतियों से पर्यावरण संरक्षित करने उपाय खोजे जा रहे है।  पंच महाभूत इस ग्रह के लिए अत्यंत आवश्यक है। एआईएमएस धामनोद के निदेशक डॉ. आर.के. पाटीदार तथा माधव विज्ञान महाविद्यालय उज्जैन के पूर्व प्राचार्य तथा अतिरिक्त संचालक प्रो. अर्पण भारद्वाज ने भी पर्यावरण चिंतन पर विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के डीन एवं कांफ्रेंस संयोजक प्रो. डी.के. वर्मा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा ने किया। अतिथियों का स्वागत डाक्टर मनीषा

सक्सेना प्रो सुनील गोयल प्रो शैलेंद्र मणि त्रिपाठी प्रो शैलेंद्र शर्मा ने किया ।


अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विश्वविद्यालय और शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में 8-9 दिसंबर, का आयोजन महू में तथा 10 दिसंबर, 2022 का आयोजन उज्जैन में आयोजित है। कांफ्रेंस में जियोलोजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस, सोसाइटी ऑफ लाइफ साइंसेज इंडिया, मध्य प्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी, डी.जी.एफ.टी.एम. जर्मनी, आदर्श इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस, भारत रत्न नानाजी देशमुख पीठ, जननायक टंट्या भील पीठ तथा वीर पुत्र महाराणा प्रताप पीठ सहयोगी संस्थाओं के रूप में शामिल हैं।   


अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में की-नोट पैनल सेशन में मुख्य अतिथि के रूप में जर्मनी के प्रो. उलरिच बर्क तथा पैनलिस्ट के रूप में प्रो. कमल जायसवाल, लखनऊ, प्रो. शमिता वोदिथाला, हैदराबाद, प्रो. श्रीनिवासुलु एन.एस. बंगलुरु, प्रो. एस.पी.सिंह, सतना, प्रो.वी.पी. सेमवाल, तेहरी, प्रो.बी.डी. जोशी, हरिद्वार, प्रो. बी.बी. वायकर, औरंगाबाद, प्रो. अनुराग त्रिपाठी, प्रयागराज, प्रो. सुदय प्रसाद, पूर्णिया शामिल हुए तथा सत्र की अध्यक्षता जियोलोजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. बी.एन.पांडेय ने किया। सत्र का संचालन प्रो. एम.एम.पी श्रीवास्तव ने किया।  अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में विश्वविद्यालय सहित देश विदेश के सैकड़ों प्रतिभागी मौजूद रहे।