लखनऊ 9 अक्टूबर ।अखिल भारतीय साहित्य परिषद की दक्षिण इकाई ने शरद पूर्णिमा और वाल्मीकि जयंती के अवसर पर आज वाल्मीकि जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए पी पी टी एवं लेख प्रस्तुति किए ।जिसके माध्यम से बताया गया की महर्षी वाल्मीकि कृत रामायण एक ऐसा ग्रंथ है , जिसने मर्यादा , सत्य, प्रेम, मित्रत्व एवं सेवक के धर्म की परिभाषा सिखाई। किसी मनुष्य की इच्छाशक्ति साथ हो बड़े से बड़े कार्य आसानी से कर सकता है । इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प मनुष्य को राजा से रंक बनाती है। इन विचारों को सभी प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्य में बताया ,सुप्रिया पांडे ने कहा कि समस्त सत्य कर्मों का आधार सत्य है। उत्साह - उत्साहो बलवानार्य नास्तुत्साहात्परं बलम। सोत्साहस्य हि लोकेषु न किंचदपि दुर्लभम्।।रिशिता सिंह,मनोज्ञा, श्रेयाअवस्थी,गुसियाबानो
तनिषा मिश्रा ने अपने विचारों को सम्मुख रखा | कार्यक्रम मे श्री निर्भय गुप्त जी अध्यक्ष लखनऊ महानगर,डॉ नीतू शर्मा अध्यक्ष दक्षिण,डॉ रीतू शर्मा, पूनम सिंह, डॉ प्रिया सिंह, ज्योति किरण अवस्थी आदि उपस्थित थे.

