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बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है: निर्मला दीदी



बाराबंकी. रुद्र अर्थात भूतभावन शिव का अभिषेक। शिव और रुद्र परस्पर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही 'रुद्र' कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी कि भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं। यह सब बाते सावन माह के प्रथम सोमवार को सत्यबन्धु भारत दैनिक समाचार पत्र द्वारा आयोजित अनवरत रुद्राभिषेक चतुर्भुज मंदिर रामपुर, जाहगीराबाद, बाराबंकी परिवार सहित पहुची प्रख्यात ज्योतिषाचार्या निर्मला दीदी ने कही. 

गौरतलब है कि इस आयोजन की प्रेरणा भी जनकल्याण एवं बाधारहित उन्नति हेतु सत्यबन्धु भारत को निर्मला दीदी ने ही दी है. 

 

दीदी ने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती है।

 

रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। हमारे शास्त्रों में विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया गया है। साधक रुद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं। किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।


• असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।

 • भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।

 • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।

 • धनवृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।

 • तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 • इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।

 • पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करें।

 • रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है।

 • ज्वर की शांति हेतु शीतल जल/ गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।

 • सहस्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।

 • प्रमेह रोग की शांति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है।

 • शकर मिले दूध से अभिषेक करने पर जड़बुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।

 • सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है।

 • शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है।

 • पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से रुद्राभिषेक करें।

 • गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।

 • पुत्र की कामना वाले व्यक्ति शकर मिश्रित जल से अभिषेक करें। ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।


आगे निर्मला दीदी ने कहा कि विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है 

तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है।

 

इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी पुराने नियमित रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग का अभिषेक बहुत ही उत्तम फल देता है किंतु यदि पारद के शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभ परिणाम मिलता है। रुद्राभिषेक का फल बहुत ही शीघ्र प्राप्त होता है। 

 

वेदों में विद्वानों ने इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। पुराणों में तो इससे संबंधित अनेक कथाओं का विवरण प्राप्त होता है। वेदों और पुराणों में रुद्राभिषेक के बारे में कहा गया है और बताया गया है कि रावण ने अपने दसों सिरों को काटकर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया था तथा सिरों को हवन की अग्नि को अर्पित कर दिया था जिससे वो त्रिलोकजयी हो गया।

 

भस्मासुर ने शिवलिंग का अभिषेक अपनी आंखों के आंसुओं से किया तो वह भी भगवान के वरदान का पात्र बन गया। कालसर्प योग, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यों की बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है।

 

ज्योतिर्लिंग क्षेत्र एवं तीर्थस्थान तथा शिवरात्रि प्रदोष, श्रावण के सोमवार आदि पर्वों में शिववास का विचार किए बिना भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है। वस्तुत: शिवलिंग का अभिषेक आशुतोष शिव को शीघ्र प्रसन्न करके साधक को उनका कृपापात्र बना देता है और उनकी सारी समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं। अत: हम यह कह सकते हैं कि रुद्राभिषेक से मनुष्य के सारे पाप-ताप धुल जाते हैं।

 

स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने भी कहा है कि जब हम अभिषेक करते हैं तो स्वयं महादेव साक्षात उस अभिषेक को ग्रहण करते हैं। संसार में ऐसी कोई वस्तु, वैभव, सुख नहीं है, जो हमें रुद्राभिषेक करने या करवाने से प्राप्त नहीं हो सकता है।

इस प्रथम सोमवार को अन्य भक्तो में सद्भावना समिति की अध्यक्षा सुश्री अपर्णा मिश्रा, सौरभ शर्मा, विक्रांत श्रीवास्तव, प्रगति श्रीवास्तव, मानस जायसवाल, आदि जायसवाल एवं अन्य भक्तगण भी रुद्राभिषेक करने चतुर्भुज मंदिर रामपुर पहुचे. 

रुद्राभिषेक पूजा करती सद्भावना समिति अध्यक्षा अपर्णा मिश्रा



इस अवसर पर महंत फूल सिंह दास, अध्यक्ष चतुर्भुज मंदिर आनंद मोहन, सत्यबन्धु सम्पादक संतोष कुमार, प्रेम विश्वकर्मा, दुर्जन, रवि रंजन सक्सेना, ज्योति रंजन सक्सेना, रीमा श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव आदि भक्तगण मौजूद रहे. 

रुद्राभिषेक का पूजन विधि विधान से पंडित सीताराम दीक्षित ने सम्पन्न किया.