न्यायमूर्ति श्री शम्भू नाथ श्रीवास्तव जी ने मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं ध्वनि प्रदुषण वायु प्रदुषण एवं मृदा प्रदुषण सहित विभिन्न प्रदूषणों के विषय मे अवगत कराया तथा चिल्ड्रेन हैंडीकैप्ड एवं यूथ से सम्बंधित तमाम बाते यूनाइटेड नेशंस के कार्यों से अवगत कराया इसके उपरान्त श्री सुरेश श्रीवास्तव, सेक्रेटरी जनरल इफुना ने यूनाइटेड नेशंस के स्थापना सहित बताया की इसकी शाखाएं संपूर्ण भारत में है तथा यह भी बताया की प्रदुषण से उत्तरी एवं दक्षिणी अंटाकटिका की बर्फ पिघल गयी तो सम्पूर्ण विश्व डूब जाएगा तथा बर्फ के अंदर छुपे हुए वायरस पूरी विश्व को दुष्प्रभावित कर देंगे तथा न्यायमूर्ति सुधीर नारायण जी ने बताया की धर्मो रक्षति रक्षितः, पर्यावरण रक्षित रक्षितः एवं कार्बन डाई ऑक्साइड सल्फर डाई ऑक्साइड नाइट्रोजन गैस एवं रेडियो एक्टिव किरणों के कुप्रभाव को समझाया.
🔹 कार्यक्रम के प्रारंभ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति श्री देवी प्रसाद सिंह जी द्वारा लिखित शोध परक नवीन पुस्तक "Ancient Indian Law" का विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति माननीय सुधांशु धूलिया ज द्वारा संपन्न हुआ।
🔸 प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सर्वोच्च न्यायालय श्री सुधांशु धूलिया जी द्वारा अन्य न्यायमूर्ति गणों एवं समस्त गणमान्य लोगों की उपस्थिति मे न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के परिसर में स्मृति स्वरूप पारिजात वृक्ष का रोपण किया गया।
🔹 मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया जी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने पर जोर दिया वही गुजरात मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रवि कुमार त्रिपाठी जी ने योग को योगा और राम को रामा कहने जैसी मानसिकता से भी बचने का अनुरोध किया।
🔸 कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में संबोधन करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्री जी सी सिन्हा जी ने राज्य एवं केंद्र सरकार से ऐसी बाध्यकारी नीति एवं योजना निर्मित करने का आह्वान किया जिससे हर तरह से सुरक्षित लाखों एकड़ के सरकारी परिसरों के भीतर पर्यावरण संरक्षण के लिए हितकारी वृक्षों को लगाने के साथ ही साथ सरकारी परिसरों में उपलब्ध खाली जमीन के एक निश्चित अनुपात में पक्के निर्माण की मनाही के साथ साथ छोटे बड़े तालाबों का निर्माण भी अनिवार्य कर दिया जाए।
🔹 कार्यक्रम के दोनों सत्रों में वनस्थली राजस्थान से आई विधि छात्राओं के समूह ने सुंदर लाए और ताल के साथ राष्ट्रगान एवं वंदे मातरम का गायन कर सभी को प्रभावित किया।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने पर्यावरण पर सम्पूर्ण रख कर विचार प्रदूषणों से सम्बन्धित तमाम कानूनों के बारे में बताया तथा न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह जी द्वारा लिखी गयी पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि श्री सुधांशु धुरिया जी द्वारा किया गया तथा प्रदुषण को दूर करने तथा पृथ्वी की सुंदरता को बढ़ाने के सम्बन्ध में वेदों से सम्बंधित जानकारी दी तथा कहा कि पृथ्वी हमारी माँ है तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा जी ने पृथ्वी पर प्रदुषण को दूर करने के उपायों के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान की तथा रूल्स आफ ला सोसाइटी के महासचिव सुधांसु श्रीवास्तव जी ने पर्यावरण के सम्बन्ध में अवगत कराया ।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री सुधांशु धुलिया जी ने हिंदी भाषा को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दिल की बात मातृ भाषा हिंदी में ही करनी चाहिए तथा बताया कि तथा बताया कि हम वसुधैव कुटुंबकम की संस्कृति में पले-बढे हैं इसलिए सारे विश्व के पर्यावरण को प्रदुषण से बचाना है तथा महान पर्यावरण विद्द श्री सुन्दर लाल बहुगुणा एवं चंडी प्रसाद जी के बारे में जानकारी प्रदान की। उक्त कार्यक्रम का संचालन श्री बालकेश्वर श्रीवास्तवा जी ने किया एवं उपरोक्त कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश से ही नहीं अपितु देश भर से कई विशिष्ट व्यक्तियों ने सहभागिता कर उक्त कार्यक्रम को सफल बनाया।
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| 🔹 न्यायमूर्ति सर्वोच्च न्यायालय माननीय सुधांशु धूलिया जी प्रथम सत्र के समापन के पश्चात आगंतुकों एवं गणमान्य अतिथियों के साथ लंच (दोपहर का भोजन )करते हुए |









