बाराबंकी : ग्रासरूट फाउंडेशन द्वारा 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन ग्राम भानमऊ, जिला बाराबंकी में किया गया। कार्यक्रम में श्री नरेश चंद्र मिश्रा वरिष्ठ जिला उद्यान अधिकारी बाराबंकी, श्री महेश कुमार श्रीवास्तव जिला उद्यान अधिकारी बाराबंकी, मौन विशेषज्ञ श्री बलराम मिश्रा, सुश्री अपर्णा मिश्रा सीईओ ग्रासरूट फाउंडेशन एवं मौन पालन एवं मधु प्रसंस्करण क्लस्टर, बाराबंकी से जुड़े लगभग 75 मौन पालकों ने भाग लिया। यह क्लस्टर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की स्फूर्ति योजनांतरगत ग्रासरूट फाउंडेशन द्वारा संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित सुश्री अपर्णा मिश्रा सीईओ ग्रासरुट फ़ाउंडेशन ने बताया कि फल, सब्जियां या अनाज की उत्तम पैदावार के लिए न केवल धूप, मिट्टी और पानी जरूरी है बल्कि मधुमक्खियों, कीटों एवं चिड़ियों का विशेष योगदान है। दुनिया में लगभग 90 प्रतिशत जंगली फूल-पौधों की प्रजातियां, 75 प्रतिशत से अधिक खाद्य फसलें और 35 प्रतिशत वैश्विक कृषि भूमि परागण पर निर्भर करती हैं। अर्थात धरती पर कृषि का एक बड़ा भाग इन्हीं कीट पतंगों पर निर्भर है। मधुमक्खियां पेड़ पौधों के पराग कणों को एक पौधों से दूसरे पौधों तक पहुंचाने एवं निषेचन में मदद करती हैं जिससे फल और बीजों की उत्पत्ति होती है। साथ ही मौन पालन से शहद, मोम, गोंद, प्रोपोलिस, रायल जेली, डंक-विष (Venum) आदि भी प्राप्त होते है।
श्री नरेश चंद्र मिश्रा वरिष्ठ जिला उद्यान अधिकारी ने उद्यान विभाग के अंतर्गत बागवानी एवं सहायक उद्यम के रुप मे मधुमक्खी पालन पर चर्चा की व मौन वंश के संरक्षण, संवर्धन के साथ उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानो को बागवानी फसलों के प्रति प्रोत्साहित कर, इनके उत्पादन में वृद्धि करना है। इससे किसानो को कम भूमि में अधिक आय प्राप्त होगी। उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बीज, कीट व फफूंद नाशक और उर्वरक आदि के लिए आंशिक/ शत-प्रतिशत अनुदान भी दिया जाता है जिसका लाभ आप ले सकते हैं।
मौन विशेषज्ञ श्री बलराम मिश्रा ने बताया कि कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशकों, कवकनाशको आदि के छिड़काव विशेषकर फूलों के समय में बहुत हानि पहुंचाता है। मधुमक्खियों के इन रसायनों के संपर्क में आने से उनकी मृत्यु दर में काफी वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त उनके व्यवहार में भी प्रभाव देखा गया - जैसे कि मधुमक्खियों के भोजन के लिये घूमना, उनकी याददाश्त, कॉलोनी प्रजनन और उनका स्वास्थ्य। जिसका सीधा असर शहद उत्पादन पर पड़ता है। पर्यावरण प्रणाली में मधुमक्खियों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है।
श्री सर्वेश कुमार फील्ड कार्यकर्ता, ग्रासरूट फाउंडेशन ने इस अवसर पर मधुमक्खी पालन की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए बताया की शहद उत्पादन बढ़ाने हेतु माइग्रेशन नितांत आवश्यक है। परंतु माइग्रेशन के समय विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता होती है अन्यथा पूरा मौन वंश खत्म हो सकता है।
सुश्री सिमरन सीडीई ग्रासरुट फ़ाउंडेशन ने बताया कि केंद्र सरकार मौन पालन को कुटीर उद्योग के रूप में प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न योजनाएं चला रही है जिसके अंतर्गत प्रशिक्षण, टूल किट वितरण व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। अतः ज्यादा से ज्यादा लोग विशेषतया महिलाएं इसे व्यवसाय के रूप में अपनाएँ एवं आर्थिक उन्नति के साथ प्रकृति के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अपना योगदान दें।
उक्त कार्यक्रम में साहबशरण, शैलेंद्र, दुर्गेश कुमार, रामा देवी, ममता वर्मा, किरण मौर्या, कीर्ति वर्मा, सामिया आदि सहित लगभग 75 मौन पालक लाभार्थी उपस्थित थे।


