लेटेस्ट खेल समाचार कोरोना देश राज्य क्राइम बिजनेस दुनिया नॉलेज ऑटो दुर्घटना ट्रेंडिंग लाइफ स्टाइल धर्म करियर टेक मनोरंजन

जल तीर्थ को जीवित प्राणी की संज्ञा दी जाए-रामाशीष



गंगा सब कष्ट निवारक हैं।


लखनऊ। गंगा का तात्पर्य केवल गंगा मैया से नहीं बल्कि सभी जलाश्रय एवं जल श्रोतों से है। पाश्चात्य अधिष्ठानो से प्रभावित विद्वान गंगा को केवल एक नदी मानते हैं। परंतु गंगा केवल नदी नहीं बल्कि समस्त पापों को हरने वाली और पृथ्वी का पालन करने वाली समस्त सृष्टि की मां होने के कारण इनको गंगा मैया कहा जाता है। टेहरी का बांध बनाने में दिया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र कानपुर आदि नगरों में बने बहुउद्देशीय उद्योगों का जलीय अपशिष्ट सीधे गंगा में गिराया जाना गंगा मैया की उपेक्षा का प्रमाण है। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार जलीय जीवों को जीवित रहने का मुख्य कारण जल में घुलित ऑक्सीजन होती है। केवल गंगा जी ही हैं जिनके प्रवाह में कल-कल की आवाज गूंजती है।जल प्रवाह के कलरव से ही जल में ऑक्सीजन घुलती है।



नदियीं पर बांध बनाने से जल का मुक्त प्रवाह रुक जाता है। अनियोजित शहरीकरण से नदियां दुसित हुई और सिमटती गयीं। प्राचीन अवधारणा है कि नदियों के दोनों ओर 5 से 6 किलोमीटर तक अंतः प्रवाह होता है। जो अतिक्रमण के कारण समाप्त होते गये। नदियों के दूषित होने के चार मुख्य कारण हैं। पहला जनसंख्या वृध्दि, दूसरा अनियोजित विकास, तीसरा विकृत आस्था और चौथा अत्यधिक प्लास्टिक का उपयोग बढ़ना। उन्होंने अनियोजित विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि गोमती रीवर फ्रंट विकास का नहीं विनाश का मॉडल है। टिहरी का बांध गंगा के अविरलता में बेड़ी बन गया। गंगा में ऑक्सीजन का स्तर कैसे संरक्षित रह सकता है जब उसका प्रवाह बांधों ने रोक दिया।महाभारत काल खंड तक ऐसा कोई पौराणिक प्रमाण नहीं है जिसमे यह वर्णित हो कि अंतिम संस्कार नदियों के तट पर करने की बात मिले। जिन मूर्तियों की हम प्राण प्रतिष्ठा करते हैं उन्हें नदियों में नहीं प्रवाहित करते। जो लोग घर का कूड़ा, पुरानी मूर्ति व अन्य अवशेष नदी में डालते हैं उन्हें नदियों के जल से मोक्ष की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। हर जल गंगा मान कर उसका संरक्षण करें। उसकी पवित्रता उसके जीवन से है। गंगा समग्र ने जल स्रोतों को जलतीर्थ घोषित करता है। जल स्रोत को जीवित प्राणी का दर्जा दिया जाय। नदियों-तालाबों का सीमांकन करके भूलेख में पंजीकृत किया जाय। नदियों को पुनः पूर्ण प्रवाह में लाने के लिये विशेज्ञों की टीम गठित की जाय। कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रांत संयोजक मोहित मिश्रा ने बताया इसी प्रकार आरती का कार्यक्रम प्रत्येक सप्ताह प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर होता रहेगा। कार्यक्रम में लखनऊ के मेयर संयुक्ता भाटिया, पूर्व मंत्री स्वाति सिंह, मनकामेश्वर धाम के महंत दिव्या गिरी जी, डॉ श्वेता सिंह जी मनीषा सिंह जी नवलेश सिंह जी नमामि गंगे के विशेष सचिव श्रीमान राजेश पांडे, एनआरटी इंडिया के डायरेक्टर अखिलेश्वर नाथ, गीता रस्तोगी, शेखर द्विवेदी जी, सर्वजीत सिंह ब्लॉक प्रमुख आदि उपस्थित गणमान्य रहे।