मंत्री रविंद्र जायसवाल, मंत्री डा. दयाशंकर मिश्र दयालु, प्राचार्य डा. सत्यदेव सिंह (बाए से)
वाराणसी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शैक्षिक संस्थाएं सिर्फ डिग्री बांटने का अड्डा न बनें। समाज से भी संबंध स्थापित करें और समाजपयोगी शोध भी करें। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के भव्य लोकार्पण के बाद यहां प्रतिदिन एक लाख श्रद्धालु दर्शन करने आ रहे है। इससे अप्रत्यक्ष रूप स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है।
टैक्सी चालक माला बेचने वाले ठेले-खोमचे से लेकर होटल, रेस्टोरेंट तक की आय बढ़ी है। इस प्रकार श्रीकाशी विश्वनाथ धाम अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सहयोग किया है। धाम से समाज को कितना लाभ हुआ। इस पर शोध करने की जरूरत है। वह शुक्रवार को डीएवी पीजी कालेज में नाट्य मंचन समारोह में बोले मुख्यमंत्री ने कहा, समाज से संबंध स्थापित करें समाजोपयोगी शोध भी करें अर्थव्यवस्था में विश्वनाथ धाम का बड़ा सहयोग, शोध करने की जरूरत है
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ डीएवी पीजी कालेज में चौरी-चौरा अपराजेय समर के नाट्य मंचन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि चौरी चौरा की लड़ाई सामान्य मानव, ग्रामीण समाज ने स्वयं लड़ी। वहीं महामना ने इस नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने जिस प्रकार इतिहास रचा। घटना का मुकदमा लड़ा और कई लोगों को फांसी के फंदे पर झूलने से बचाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सीएम योगी, मंत्री रविंद्र जायसवाल, आयुश मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु , प्राचार्य डा. सत्यदेव सिंह, बीएचयू के रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला, प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने दीप जलाकर किया। जे डी प्रदीप कुमार, प्रो. विजय बहादुर सिंह, प्रो. जीसीआर जायसवाल, प्रो. बिंदा परांजपे, पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्रा, डा. समीर कुमार पाठक आदि भी उपस्थिति थे।
चौरी-चौरा शताब्दी समारोह के तहत आयोजित चौरी-चौराः अपराजेय समर के नाट्य दृश्यांकन देख मुख्यमंत्री भी भावुक नजर आए। रंगकर्मी व्योमेश शुक्ला के निर्देशन में विद्यार्थियों ने चौरी-चौरा कांड को जीवंत कर दिया। गोरखपुर के चौरा गांव में ब्रिटिश हुकूमत के जुल्म के खिलाफ चार फरवरी 1922 को ग्रामीणों के विद्रोह ने सरकार की चूलें हिला दीं। गांधी जी के आह्वान पर युवाओं ने दमन की परवाह किये बगैर अंग्रेजो के पिटू बने सरदार संत बख्श सिंह, दारोगा गुप्तेश्वर सिंह जैसे जालिमो के अन्याय के विरूद्ध ना सिर्फ आवाज उठाई बल्कि समाज के सामान्य नागरिकों के क्रोध की अभिव्यक्ति को प्रकट करते हुए चौरी चौरा विद्रोह का इतिहास रचा

