न ओटी,न अस्पताल
मरीज हो रहे हलाल
यह है झोलाछाप डॉक्टरों का हाल
सत्यबन्धु भारत
शाहाबाद,हरदोई। पेशे से अनजान व्यक्ति जब इंसानी जिंदगी से खिलबाड़ करने लगे तो व्यवस्था पर सबाल उठना लाजिमी है।क्षेत्र में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर इंसानी जिंदगी के लिये खतरा बनते जा रहे हैं। जिनका न कहीं कोई रजिस्ट्रेशन है और न ही कोई डिग्री है।उसके बाबजूद झोलाछाप डॉक्टरों की पौबारह है। जबकि तहसील क्षेत्र में 2 सीएचसी और आधा दर्जन पीएचसी संचालित की जा रही हैं।सरकारी सुविधाओं से लैस इन अस्पतालों में सभी मूलभूत सुविधाएं देने का दावा किया जाता है। सच तो यह है कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के न मिलने से ही झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या नित रोज बढ़ रही है। यही झोलाछाप डाक्टर किसी भी तरह के रोगी को भर्ती करने से भी नही हिचकते हैं। कोई भी बीमारी होने पर मरीजों को झोलाछाप डॉक्टर ही याद आते है और लोग इस विश्वास के साथ ऐसे डॉक्टरों के पास ठीक होने का मंसूबा लेकर जाते हैं लेकिन जब डॉक्टर को इलाज करने की पूर्ण जानकारी न हो तो इलाज के नाम पर ये झोलाछाप निश्चित ही मरीजों को सिर्फ लूटने का ही काम करते हैं।नगर सहित पूरे तहसील क्षेत्र में तो झोला छाप डॉक्टरों की भरमार है,किसी डॉक्टर के सानिध्य में चार छः महीने ट्रेंनिग करके ये खुद की कोई छोटी-मोटी दुकान खोलकर डॉक्टर बन जाते हैं और मरीजों को इलाज के नाम पर लूटते रहते हैं। कहीं-कहीं ये झोलाछाप पेशे से अनजान लड़कों को रखकर उनसे दवा बंधवाते हैं यही अनजान लड़के मरीजों को बोतल तक चढ़ा देते हैं,और डॉक्टर पैसे गिनते रहते हैं।
ऐसा ही नजारा मंगलवार को शाहाबाद मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर दूर परेली गांव में देखने को मिला जहाँ रोड के किनारे एक छोटी सी दुकान में बैठा एक झोलाछाप डॉक्टर अनजान लड़कों से दुकान के बाहर खड़े पाकड़ के पेड़ में बोतल टांगकर मरीजों को लगाता दिखा।
ऐसे डाक्टर एक नही बल्कि नगर सहित ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक खुले हुए हैं।कुछ बाइकों में बैग टांगकर बेखौफ इलाज के नाम पर ठगी करते नजर आते हैं। हर गली मुहल्लों में झोलाछाप डॉक्टर साहब के क्लीनिक मिल जाएंगे। जहां बिना कोई डिग्री लिए फर्जी डॉक्टर बनकर मरीजों को इलाज के नाम पर रकम ऐंठने व उनके जीवन से खिलवाड़ करते बड़ी आसानी से फूस के बने छप्परों,पेड़ों के नीचे बोतले टंगी देखने को मिल जाएंगी,लेकिन फर्जी रूप से चल रहे ऐसे क्लीनिकों पर जिम्मेदारों की नजर नहीं पड़ती। आए दिन ऐसे मामले प्रकाश में आते हैं कि मामूली बीमारी को भी ये झोलाछाप इलाज करते-करते ठीक न कर पाने पर गंभीर बताकर निजी अस्पतालों में भर्ती करवाकर मोटा कमीशन भी लेते हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो यदा-कदा ही इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही की जाती है, बाद में मोटी रकम लेकर मामला रफा-दफा कर पुन: मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का लाइसेंस दे दिया जाता है।
इस सम्बंध में सीएचसी अधीक्षक एमपी जायसवाल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जांच कराएँगे।यदि बिना डिग्री और बिना मानक क्लीनिक चल रहा है तो कार्यवाही की जाएगी।

