बच्चों के सर्वांगींण विकास से देश की उन्नति संभव : कैलाश सत्यार्थी, नोबेल विजेता
14 अप्रैल को सायं 7 बजे विश्वविद्यालय में भक्तिमति शबरी वनवासी लीला नाट्य मंचन
महू। समानता के भाव से न्याय समाज के निर्माण की आवश्यकता है। समाज के अभ्युदय से ही देश का विकास संभव होता है। हमें अध्ययन-अध्यापन से रुढ़ियों, अन्याय एवं विषमताओं को दूर करने की आवश्यकता है। सभ्यता निरंतर गतिशील होती है उसे जड़ता से बहार होकर देखने की जरुरत है।समाज के अन्दर जो बदलाव आये हैं उनमें शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हमें भविष्यगामी लक्ष्यों एवं योजनाओं के साथ कार्य करने की जरुरत है। आर्थिक बंधनों एवं शोषण मुक्ति से ही स्वस्थ समाज की कल्पना कर सकते हैं। उक्त बातें डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान में बाबा साहेब की जयंती के पूर्व संध्या पर आयोजित शिक्षक उन्मुखीकरण कार्यक्रम में नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कही।
बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विश्व के ख्यातिलब्ध शांति के क्षेत्र में नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी का आगमन हुआ। श्री कैलाश सत्यार्थी डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय में 14 अप्रैल को होने वाली राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘डॉ. अम्बेडकर का समतामूलक समाज दर्शन, समावेशी राष्ट्र निर्माण और विश्व शांति स्थापना’ भाग लेने पहुंचे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी. के. शर्मा, कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा, संकायाध्यक्ष प्रो. डी.के. वर्मा, प्रोटोकाल अधिकारी प्रदीप कुमार तथा डॉ. पी.सी. बंसल ने देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पर पहुंचकर नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी का पुष्प गुच्छ और माल्यार्पण से स्वागत एवं अभिनंदन किया।
विश्वविद्यालय प्रांगण में पहुँचते ही नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी का विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष प्रो. देवाशीष देवनाथ, प्रो. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, डॉ. मनीषा सक्सेना, डॉ. धनराज डोंगरे, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. कौशलेंद्र वर्मा, नमिता टोप्पो, सहायक, वरिष्ठ परामर्शी प्रो. एम.एम. श्रीवास्तव, सहायक कुलसचिव संध्या मालवीय, डॉ. दीपक कारभारी तथा विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों द्वारा पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। अभिनन्दन उपरांत श्री सत्यार्थी ने तथागत बुद्ध तथा डॉ. अम्बेडकर के समक्ष पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन किया।
श्री सत्यार्थी ने शिक्षकों को शिक्षा को समाज से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागी कार्यक्रम में सपत्नी नोबल पुरस्कार विजेता का सानिध्य पाकर गौरवान्वित हुए। लोगों ने विभिन्न मुद्दों पर उनसे प्रश्न उत्तर भी किये। उन्मुखीकरण कार्यक्रम का संचालन संकायाध्यक्ष प्रो. डी.के. वर्मा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा ने किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी. के. शर्मा ने बताया कि बाबा साहब डॉ.अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अतिथि के रूप में नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी का आगमन विश्वविद्यालय के लिए गौरव का पल है। 14 अप्रैल को उच्चशिक्षा मंत्री मोहन यादव, राष्ट्रवादी विचारक सुनील जी आंबेकर, पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर, धार सांसद छतरसिंह दरबार, इंदौर के सांसद शंकर लालवानी तथा म.प्र. संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर भी शामिल होंगे। 14 अप्रैल को राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा सायं 7 बजे भक्तिमति शबरी वनवासी लीला नाट्य मंचन विश्वविद्यालय के बुद्ध विहार में किया जायेगा।
जयंती महोत्सव कार्यक्रमों के श्रंखला की शुरुआत 12 अप्रैल को ‘साहित्य, अध्यात्म और दर्शन पीठ’ द्वारा राष्ट्रीय कवि सम्मलेन से हुई है। पीठ के उद्घाटन और काव्य गोष्ठी में देश के नामचीन कवि एवं साहित्यकार डॉ. जगमोहन शर्मा सहित, पीठ मानद आचार्य डॉ. स्नेहलता श्रीवास्तव एवं अन्य 10 कवियों द्वारा काव्यपाठ प्रस्तुत किया गया। 13 अप्रैल को भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, डॉ. अम्बेडकर ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की गयी। तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थी मयंक साहू प्रथम, निखिल गौर द्वितीय, कविता सिंह तृतीय तथा मयंक झा को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ, डॉ. ज्ञान क्विज प्रतियोगिता विद्यार्थी आरती मंडलोई प्रथम स्थान, शारदा विश्वकर्मा द्वितीय तथा अंकित मुकाती तृतीय स्थान पर रहे। प्रतियोगिता का संयोजन डॉ. जया कमेरिया तथा रश्मि अग्रवाल ने किया। 14 अप्रैल को राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा सायं 7 बजे भक्तिमति शबरी वनवासी लीला नाट्य मंचन विश्वविद्यालय के बुद्ध विहार में किया जायेगा। इस अवसर विश्वविद्यालय परिवार के सभी अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी उपस्थित रहे।

