कन्नौज में भाजपा ने तीनों सीटे जीतकर इतिहास रच दिया
कानपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर के चुनाव मैदान में आ जाने से कन्नौज सदर विधानसभा की सीट शुरू से ही हॉट रही है। सपा के प्रत्याशी अनिल दोहरे चौथी बार चुनावी मैदान में थे। यहां एससी वर्ग के वोटरों की आबादी सबसे अधिक है। इसके बाद मुस्लिम की आबादी है।…..
अखिलेश के गढ़ कन्नौज में सपा तीनों खाने चित्त : इस सीट पर 20 साल बाद खिला कमल, कन्नौज में भाजपा ने तीनों सीटे जीतकर इतिहास रच दियाकन्नौज में भाजपा ने तीनों सीटे जीतकर इतिहास रच दिया
अखिलेश के गढ़ कन्नौज में सपा तीनों खाने चित्त हो गई है। इत्र नगरी की जनता जनार्दन ने जातियों की गोलबंदी तोड़कर सपा को बड़ा झटका दिया। यहां के वोटरों ने भाजपा को कन्नौज सदर के साथ छिबरामऊ और तिर्वा सीटों पर भरपूर आशीर्वाद दिया है।
जिले में 20 फरवरी को हुए मतदान में यह बात साफ हो गई थी, कि जो पार्टी जातियों की गोलबंदी तोड़ेगी, उसी को जीत मिलेगी। इसे मोदी और योगी की जोड़ी ने चरित्रार्थ करते भाजपा को शानदार जीत दिलाई है। सपा का गढ़ कहे जाने वाले कन्नौज में भाजपा ने तीनों सीटे जीतकर इतिहास रच दिया है। खास बात यह रही कि सदर सीट पर 20 साल बाद कमल खिला है।
सदर में बेस वोट के साथ असीम के खाते में आए एससी मतदाता : कानपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर के चुनाव मैदान में आ जाने से कन्नौज सदर विधानसभा की सीट शुरू से ही हॉट रही है। सपा के प्रत्याशी अनिल दोहरे चौथी बार चुनावी मैदान में थे। यहां एससी वर्ग के वोटरों की आबादी सबसे अधिक है। इसके बाद मुस्लिम की आबादी है।
असीम की ज्यादा यहां पहचान नहीं रही है, मगर इनके पिता एवं पूर्व डीजीपी स्व. श्रीराम अरुण ने करीब 30 साल पहले दलितों के उत्थान के लिए कई कार्य किए। इसके चलते भाजपा के बेस वोट के साथ अनिल को मिलने वाला ज्यादातर एससी वोट असीम को मिला। वहीं स्थानीय स्तर पर कई सपा नेताओं के मारपीट की हरकतों की वजह से पार्टी को इस बार यादव और मुस्लिम का भी पूरा वोट नहीं मिल पाया।
अंतिम चरण तक रही कांटे की टक्कर : तिर्वा में सपा और भाजपा के बीच अंतिम समय तक कांटे की टक्कर रही है। यहां पर लोधी वोटरों के बाद यादव, पाल, मुसलमान मतदाता हैं। भाजपा लोधी, राजपूत और पार्टी के परंपरागत ब्राह्मण, क्षत्रिय, और पिछड़ा वर्ग के वोट को देखते हुए पूर्व विधायक कैलाश राजपूत को दोबारा टिकट मिला था।
लेकिन भाजपा से बगावत करके बसपा से चुनाव लड़ने वाले अजय वर्मा ने कैलाश की कई बूथों पर नुकसान किया, जिसके कैलाश की राह आसान नहीं रही। अंतिम समय पर नाराज शाक्य वोट बीजेपी में आ जाने से बीजेपी जीत गई।
छिबरामऊ में ताहिर का डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाई सपा : छिबरामऊ में अंत तक सपा पूर्व विधायक ताहिर का डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाईं। अरविंद यादव ने अंतिम समय पर ताहिर को अपने पाले में कर तो लिया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
समाजवादी पार्टी के अनिल पाल को इस बार यादवों का वोट तो मिला, लेकिन मुस्लिम का वोट बंट गया। पूर्व विधायक ताहिर को टिकट नहीं मिलने से मुस्लिम ने सपा को सबक सिखाया है। यही वजह है कि भाजपा प्रत्याशी अर्चना पांडेय दोबारा बड़ी जीत हासिल की है।
