सत्यबंधु भारत
लखनऊ। ImpactEd India द्वारा शुरू किया गया Lost & Bound अभियान ज़रूरतमंद बच्चों की शिक्षा में एक रिक्त स्थान की पूर्ति करने का काम कर रही है। "जिन पुस्तकों को लोग कुछ पैसों के लिए कबाड़ में बेच देते हैं, वो पुस्तकें किसी और के लिए अमूल्य सिद्ध हो सकती हैं" इसी विचार के साथ इंपैक्ट इडी इंडिया इस अभियान को लगातार विस्तृत करने के कोशिश कर रही हैं।
लखनऊ में इस संस्था की हेड आकांक्षा, कोऑर्डिनेटर रेवती और ताश्विक ने मिलकर 100 किताबे एकत्रित की। NRT India वो पहली संस्था है जहां किताबें डोनेट की गईं। यह अभियान दिल्ली औरंगाबाद और चंडीगढ़ में भी प्रगतिशील है।
इंपैक्ट इडी इंडिया के अनुसार कुछ लोगों के लिए अनुपयोगी हो चुकी पुस्तकें जब किसी के बस्ते में ज्ञानार्जन उद्देश्य से बंधती हैं तो वह एक बेहतर संसार की तरफ सबसे पहला कदम होता है।
बाज़ार में किसी किताब के पन्ने पर भेलपुरी या चने को बिकते हुए आपने देखा होगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक उपयोग के पश्चात पुस्तकों को लोग निरर्थक समझने लगते हैं। लोगों की इसी सोच पर चोट करना और उन्हें प्रेरणा देने का अभियान है लॉस्ट एंड बाउंड।
आकांक्षा कहती हैं, "हम जिन किताबों को पढ़कर इतना आगे आए हैं यदि उन्हीं किताबों के पन्नों को रद्दी के भाव से तोला जाय तो हमे वह ज्ञान का तिरस्कार मालूम पड़ता है। इस अभियान के माध्यम से यही कोशिश है कि पुस्तकों का ज्ञान जल की तरह बहते रहना चाहिए। यदि एक बार उसका उपयोग कर अपनी तृष्णा को शांत कर ली है तो उसी पुस्तक को किसी अन्य प्यासे तक पहुंचा देना ही सर्वश्रेष्ठ है।"
इंपैक्ट इ डी इंडिया लखनऊ हेड आकांक्षा ने बताया कि फिलहाल जान पहचान के लोगों के माध्यम से किताबें एकत्रित कर रहे हैं। इसके बाद स्वयं रिसर्च कर के उन संस्थाओं अथवा लोगों तक इन पुस्तकों को पहुंचाते हैं जिनके माध्यम से यह ज़्यादा से ज़्यादा जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
लोगों तक पहुंचना और उन्हें यह यकीन दिलाना कि "हमारे माध्यम से उनकी किताबों का रद्दी से बेहतर प्रयोग हो सकता है" बहुत कठिन होता है। कई बार यह प्रश्न भी किए गए कि इस अभियान से जुड़ने के बाद या किताबें डोनेट करने से उनका क्या फ़ायदा होगा! और यदि उनका कोई सीधा फायदा नहीं होता है तो वो साथ देने से मुकर जाते हैं। यह संकुचित मानसिकता हमारे लिए एक बहुत बड़ी बाधक है।
किताबों के प्रति लोगों की मानसिकता को बदलना और ज़रूरतमंद बच्चों की शिक्षा में मदद करना मुख्य उद्देश्य हैं।
इसी क्रम में लखनऊ की जानी मानी 31.5 घण्टे पढ़ाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करने वाली NRT INDIA (IIT -JEE (M & A) । NEET। FOUNDATION) कोचिंग जो कि गरीब बच्चों को निःशुल्क तैयारी कराती है उनके डायरेक्टर अखिलेश्वर नाथ पांडेय को लगभग 100 पुस्तकें वितरण हेतु दी गई। इस कार्य में इन युवाओं का हर तरह से सपोर्ट करने का डायरेक्टर अखिलेश्वर नाथ पांडेय ने आश्वासन दिया और उनके सराहनीय कार्य के लिए प्रशंशा करते हुए कहा कि देश के युवा इस सोंच के होने से ही भारत विश्वगुरु बनेगा
आकांक्षा कहती हैं कि यदि आप हमारे साथ इस अभियान में किसी भी रूप में जुड़ना चाहते हैं तो impactedindia@gmail.com अथवा akanksharma1573@gmail.com के माध्यम से हम तक पहुंच सकते हैं और इस अभियान में हमारे साथ सहभागिता कर सकते हैं।
