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दिवंगत जनरल बिपिन रावत जी को समर्पित कविता



आसामान भी खुलकर शायद आज जी भरकर रोया है।

रावत जी के रूप में हमने सच्चे सपूत को खोया है।

निडर ,लीडर अद्भुत, साहस,देशप्रेम भरपूर था।

राष्ट्रभक्ति का नशा चढ़ा था सबसे अलग जरूर था।

जब तक सूरज चांद रहेगा,इस अनन्त आकाश में,

अमर हो गया आपका सांसों की हर सांस में।

सर्जिकल के  सेनानायक, ऐसे हमको छोड़ गए।

पत्नी सहित हमारे नायक हमसे ही मुंह मोड़ गए।।

जिनकी दम पर हर दुश्मन को हमने घूल चटाई है।

मुल्क पड़ोसी ने सीमा से अपनी फौज हटाई है।।

सारा भारत आज हमारा ,फूट फूट कर रोया है।

असली शेर बिपिन रावत को ,आज अचानक खोया है।।

सेना में पी एच डी करके करिअर को प्रारम्भ किया

देश सेवा को ही कर्म मानकर सेवा का संकल्प लिया

पत्नी ने भी हर पल उनका ऐसे साथ निभाया है।

साथ विदा हो गई सुहागिन दुनिया को बतलाया है।।

हर फ़ौजी को प्रिय लगता है अपना यह हिंद चमन।

हे भारत के वीर पुरुष , है तुमको अंतिम आज नमन।।

रंजना सिंह बुंदेला



प्रस्तुति:

रंजना सिंह बुन्देला                

अध्यक्ष, पार्थ  फाउंडेशन  ।।