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3 साल के खोए हुए बच्चे को कड़ी मसक्कत के बाद माँ के सुपर्द किया



सत्यबन्धु भारत

लखनऊ। समाजसेवी पशु प्रेमी रितेश त्रिवेदी कहते हैं कि मैं कुछ नही कर रहा हूं कराने वाला ऊपर वाला है बस आपका मन जो सोचेगा उसी तरह कर्म होते जाएंगे" आज रात्रि तकरीबन 10.30 बजे बादशाह नगर मेट्रो स्टेशन के पास कड़ाके की ठंड में नङ्गे पांव एक 3 से 4 साल का बच्चा रोते ज रहा था और चलता जा रहा था मुझे कुछ सही न लगा तो पीछा किया आगे एक ट्रक से टकराने वाला था कि उसे रोका फिर एक टेम्पो से टकराते बचा पकड़कर पूछने पर इशारे से रोते रोते हुए कहा आगे रहता हूँ आगे गया तो फिर हाँथ दिखाया। एक भैया जिनकी पंचर बनाने की दुकान बादशाह नगर उमराव मॉल के पास है उन्होंने भी उससे पूछने की कोशिश की वो बहुत छोटा था कुछ भी बताने में असमर्थ तथा बस रोता जा रहा था।  मैं समझ गया कि ये अपना घर भूल गया है तत्काल गोदी में बैठाया और हम लोग निशातगंज पुल के नीचे चौकी पहुंचे फेसबुक लाइव और चाइल्डलाइन पर सूचना दी वर्षा वर्मा ने भी हर मुमकिन कोशिश की। 12 बजे के करीब पता चला कि बच्चे की माँ इसे ढूंढते हुए स्टेशन के पास आई है उसे चौकी लाया गया। बच्चे को पाकर चूमने लगी बच्चे का नाम लकी था। बच्चे के पिता नही है माँ खाना बना रही थी तभी दरवाजा खुला पाकर भाग आया। तकरीबन 5 किलोमीटर दूर किसी गाड़ी की चपेट में आने से बचा सोच के देखिये अगर इसे ऐसे छोड़ दिया जाता कि क्या करना हमे चलो भाड़ में जाये कोई उठा ले जाता या किसी गाड़ी के नीचे आजाता इतनी कड़ाके की ठंड में जब सब कम्बल में है ये नङ्गे पांव ऐसे रोते हुय भटक रहा मुझे अपनी माँ से बिछड़ने पर इतनी पीड़ा है तो ये मासूम के बारे में सोचिये खैर  नारायण की कृपा से माता के पास सुपुर्द कर दिया ऊपर वाले ने रचा था भूमिका मेरी भी लिखी थी। सजगता ही समाज को सकारात्मक बदलाव की तरफ अग्रसर करती है। पशु प्रेमी रितेश त्रिवेदी के इस सजग सराहनीय कार्य को सत्यबन्धु भारत भूरि भूरि प्रशंशा करता है की आपने एक मासूम को उसकी माँ से पुनः मिलवा दिया।