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अपूर्वा दीक्षित ने पेश की ईमानदारी और सच्चाई की खूबसूरत मिसाल



कोचिंग के डायरेक्टर छात्रा के भाव और ईमानदारी देखकर हो गए भावुक


सत्यबन्धु भारत, प्रेम विश्वकर्मा


लखनऊ। मनसा वाचा कर्मणा का सिद्धांत कहने से नहीं पूरा होता है। यह एक साधना की तरह है तपस्या है। यहां अंतःकरण का विषय है सोच का विषय है। जिसके हृदय में सहजता है सौम्यता है,सरलता है, वाणी में मधुरता है, निश्चय ही उसका जीवन आदर्शमय होगा। उसकी ईमानदारी की सीख में गंभीरता होगी। ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रेरणा स्रोत का कार्य करते हैं। उदाहरण स्वरूप उन्हीं के गुणों का बखान किया जाता है।  


आज एक ऐसी ही छात्रा का जिक्र है जिसने ईमानदारी और सच्चाई की खूबसूरत मिसाल पेश की है। अपने गुरुजनों की बातें ध्यान में रखकर स्वअर्जन करना भी सीखा। लगभग 6 साल बाद छात्रा अपनी कमाई की पहली पूंजी गुरु जी के चरणो में गुरु दक्षिणा स्वरूप ले आई। यह घटना बनावटी समाज और खोखले विचारों पर घोर प्रहार है।  गांधी सुभाष टैगोर तिलक कोई नहीं बन सकता तो क्या कोई अपूर्वा दीक्षित सा भी नहीं बन सकता।  आइए इस लेख में जानते हैं पूरी घटना----


एनआरटी इंडिया कोचिंग संस्थान के संस्थापक अखिलेश्वर नाथ पांडे उस समय हतप्रभ हो गए जब 6 वर्ष पूर्व ग्यारहवीं क्लास की छात्रा ने कोचिंग फीस सामने रख दी। पूर्ण घटनाक्रम जानकर आत्म विभोर हो गए। छात्रा की ईमानदारी सच्चाई सहजता देखकर  मन प्रफुल्लित हो गया। इस कार्य से अति प्रसन्न होकर छात्रा का उज्जवल भविष्य हो,आशीर्वाद देते हुए माता-पिता द्वारा प्रदत संस्कारों की भूरी भूरी प्रशंसा की। शिवाजी पुरम सेक्टर 11 में अपने माता पिता के साथ अपूर्वा दीक्षित रहती हैं। माताजी प्राइमरी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। पिताजी समाज कल्याण विभाग में अकाउंट ऑफिसर हैं। भाई सुमित दीक्षित एसएससी की तैयारी कर रहे हैं। 

अपूर्वा दीक्षित बीएड की पढ़ाई कर रही हैं जब वह 11वीं क्लास में थी तब एनआरटी इंडिया कोचिंग संस्थान में पीसीएम कोचिंग पढ़ने आई किसी कारणों से कोचिंग की फीस नहीं जमा कर सकी समय बीतता गया यह बात माता-पिता को मालूम चली फीस जमा करने को कहा पर अपूर्व दीक्षित ने यह कहकर मना कर दिया कि अब मैं अपने कमाए हुए पैसे से ही फीस जमा करूंगी यह दृढ़ निश्चय कर अपूर्व दीक्षित ने ऑल अबाउट इंग्लिश कोचिंग खोली जिसमें ऑनलाइन पढ़ाती हैं यहीं से प्राप्त पैसे लेकर बड़े भाई सुमित दीक्षित के साथ एनआरटी इंडिया कोचिंग संस्थान जाकर बड़े ही सौम्य सरल भाव से अभिवादन करके डायरेक्टर अखिलेश्वर नाथ पांडे के सामने फीस रख दी।

जब अपूर्व दीक्षित से यह प्रश्न पूछा गया कि ऐसा करने का भाव कैसे आया यह तो बहुत पुरानी बात हो गई है तब अपूर्वा दीक्षित ने प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा यह सब बड़े गुरुजनों का ही आशीर्वाद है जो ऐसा अनुकरण कर रही हूं गुरुजी की प्रेरणादायक बातों को सुनकर यह सब भाव मन में आते हैं। गुरु जी कहते हैं कि शंकित मन से किया हुआ कार्य का परिणाम सुखद नहीं होता, जिसके मन में विश्वास प्रबल होगा उसकी जीत निश्चित होती है विश्वास से भरा मन कभी नहीं हारता। विषम परिस्थितियों में व्यवहार कुशल रखना है हमने गुरुजी से ही सीखा है। 

 सामाजिक दृष्टि पटल पर अपूर्व दीक्षित ने स्वाभिमानी मापदंड स्थापित किया है यह प्रेरणा दायक है अनुकरणीय है प्रत्येक अभिभावक को उच्च शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की शिक्षा देनी चाहिए। जिससे उनका  स्वाभिमान,आत्म सम्मान का विकास हो। स्वालंबी बने समाज में नैतिकता की मिसाल पेश करें। धन से धन की वृद्धि हो सकती है संस्कारों की नहीं। माना कि बुद्धि  प्रवीण हैं,परिपक्व है, पर पुण्यता की ओर नहीं तो उसका अभिप्राय क्या। प्रेरणा ले, और विचार करें।