सत्यबन्धु भारत।दीपक मिश्रा
उन्नाव। सूबे के योगी सरकार चुनावी रण में बिजली पानी सडक़ के नाम पर वोट बटोरने में कामयाब रही थीं। यहीं नही अपने दावों को अमली जामा पहनाने की तैयारियां दिखा दिखाकर सरकार ने चार साल से अधिक काट भी लिये।
अब जब सरकार अपने अंतिम दौर के कार्यकाल को निपटाने में लगी है। ऐसे में भी कुछ जरूरी सुविधाये भी सरकार को मुहैया करा पाना विभागों की नाकामियों के चलते दुर्भर हो चला है। ये वहीँ सुविधाये हैं। जो सरकारों के चुनावी मैंनिफेस्टो मे अक्सर प्राथमिकता के
आधार पर शीर्षक पर रहती हैं। अब गांवों की बिजली व्यवस्था को ही ले ले तो आपको दिखेगा की गांवों की जनता इस भारी गर्मी में पसीना पसीना हो चुकी है। विभागीय कारगुजारियों का आलम ये है कि शाम होते ही बिजली कटौती शुरू हो जाती हैं। जबकि सरकार के हवा हवाई दावे के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घँटे बिजली देने के दावे हुए थे। ग्रामीणों की माने तो सिर्फ 4 घँटे भी बिजली नही मिल रही हैं। हा मानते हैं कि गर्मियों में अक्सर ये समस्याये उत्पन्न हो जाती हैं। परंतु सरकार को वोट तो इसी समस्या से निपटने के लिए दिये जाते हैं। या सत्ता पा लेने के बाद राजवीय ठाट गांठने के लिए जवाब तो सरकार के बड़े बड़े मंत्रियों से लेकर क्षेत्रीय विधायको तक दे पाना संभव नहीं दिखाई देता।
बहराल जनता हमेशा की तरह नेताओ के दावों और वादों से मुर्ख बन अपनी मूर्खता का खामियाजा भुगत रही हैं। आपको बता दे यू तो गांवो में बिजली कटौती आम बात हो चली है। रात हो या दिन जब मर्जी होती हैं सरकार की बिजली कट जाती हैं। यही हाल सोनिक पॉवर हाउस,के अधिकारी व कर्मचारियों की लापरवाही से बिछिया सबस्टेशन, से जुड़े कई गांवों में शाम होते ही अंधेरा पसर रहा है। कई गांवो में बिजली को लेकर लोग कॉफी परेशान हैं। यहाँ लगातार बीते दिनों में बिजली कटौती का आलम यह है, कि वाशिंदों का बिजली कटौती के चलते गर्मी से वो बुरा हाल हुआ है। कुछ को डी हाईटेंशन के कारण अस्पताल का रास्ता देखना पड़ा गया है।
मगर जनाव बिजली विभाग के एयरकंडीशन कमरों में बैठे अधिकारी शायद ही गरीबों के पंखो की हवा की और इस हवा से मिलने वाली गर्मी को समझ पाएंगे। सरकार की ये चंद मिनटों के लिए दर्शन देने वाली बिजली महज घरेलू बिजली उपकरणों का काल बनके रह गई हैं।
उधर योगी सरकार में बिजली घर के अधिकारियों का ये आलम हैं कि अधिकारी जनता का फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझते तो समस्या का निदान करना तो भूल ही जाईये। कभी भूलकर किसी अधिकारी ने फोन उठा भी लिया। तो उनके पास हर समस्या का रटा- रटाया महज एक उत्तर होता है, फाल्ट हैं। आखिर जनता कब तक इन बिजली फाल्ट समस्या का बोझ झेलती रहेगी। सूबे की योगी
सरकार जो ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घण्टा बिजली मुहैया कराए जाने के दावे पर सत्ता पर काबिज हुई थी। क्या योगी सरकार के पास जनता के इस सवाल का जवाब हैं। क्या बिजली विभाग की कारगुजारिया और नौकरिया सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए काफ़ी नहीं है। क्या ऐसे विभागों से त्रस्त हुई। जनता चुनाव में अपनी ये समस्याएं भूल जाती है। सवाल कई होते हैं। जवाब बस उत्तर एक हैं। फाल्ट हो जाता है। बिजली के तारों में भी और चुनावी दौर में भी जनता की मानसिकता ,याददाश्त ,सोच और विवेक पर भी। फिलहाल तो जनता अपनी समस्याओं से रूबरू होते हुए। सरकार और ऐसे बिजली विभाग के अधिकारियों को कोसते हुए। गर्मियों के रात -दिन हाथों से एक दूसरे के पंखा करते हुए। गर्मी काट रहे हैं।
