
सत्यबन्धु भारत
बांगरमऊ उन्नाव। क्षेत्र के ग्राम माढ़ापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रांगण में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के पंचम दिवस कानपुर की विख्यात कथावाचक बाल साध्वी प्रतिभा रामायणी ने श्रोता भक्तों को वात्सल्य रस से परिपूर्ण भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर श्रोता भक्तों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने
कहा कि पृथ्वी पर धर्म की स्थापना हेतु भगवान महामानव के रूप में अवतरित होते हैं।
क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी सुंदरलाल कठेरिया और राम भजन कठेरिया द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के अंतर्गत आज बाल साध्वी रामायणी ने कृष्ण जन्म की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस का अत्याचार इतना अधिक बढ़ गया कि साधु संत और सज्जन वृंद सभी त्राहि-त्राहि करने लगे। पृथ्वी पर धार्मिक कार्य बंद करा दिये गए। जबकि राक्षसी प्रवृत्तिया बढ़ने लगी। तब देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने मनुज अवतार लेने का निश्चय किया। इसी निश्चय के तहत
भगवान विष्णु ने जेल में बंद देवकी के गर्भ से भगवान कृष्ण के रूप में अवतार लिया। भगवान कृष्ण की रक्षा हेतु वसुदेव उन्हें रातो-रात नंद बाबा के यहां गोकुल ले गए। नंद बाबा के यहां बालक के जन्म की सूचना मिलते ही गोकुल में बधाइयां बजने लगी। इस अवसर पर बाल साध्वी ने बधाई और सोहर गीत प्रस्तुत कर श्रोता भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पांडाल में भगवान कृष्ण की जय जयकार होने लगी। बाद में उन्होंने कीर्तन के माध्यम से वात्सल्य रस से परिपूर्ण भगवान
कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। जिसे सुनकर श्रोता भक्त नृत्य करने लगे।
