सत्यबन्धु भारत
बांगरमऊ उन्नाव। इंदिरा गाँधी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मिशन शक्ति के तृतीय चरण के अंतर्गत आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण व लैंगिक समानता पर वेविनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा हमारे समाज में आज भी लैंगिक असमानता विद्यमान है। लेकिन हमारा संविधान जाति , धर्म , लिंग व भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करता । प्राचार्य डॉक्टर सदानन्द राय ने कहाकि आज भी समाज में पुत्र के जन्म पर लड्डू बांटे जाते हैं और पुत्री होने पर दुःख प्रकट किया जाता है । उन्होंने कहा कि लेकिन संविधान ने हमे ऐसे अधिकार दिए हैं जिसके बल पर महिलायें समानता के स्तर पर धीरे धीरे आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा क
ि अनुच्छेद 15 के आधार पर हमारा संविधान जाति, धर्म, लिंग, भाषा के आधार पर मेदभाव नहीं करता। कार्यक्रम की संयोजक सविता राजन ने बताया कि किसी भी देश एव समाज में पुरुषों एव स्त्रियों की बराबर भागीदारी उसकी प्रगति के लिए अत्यन्त आवश्यक है। डॉ० अनीता बाजपेयी ने कहा कि लैंगिक असमानता समाज में आज भी दिखाई देती है। महिलायें आजीवन संरक्षण में दिखती
है । उनकी स्वयं की कोई स्वतंत्रता नहीं होती है । उन्होंने कहा कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक समाज है, जिसमें पिता के निर्णय ही सर्वोपरि होते हैं ।इसलिए आज भी शिक्षित महिलाओं के निर्णय नहीं माने जाते है । जबकि कृषि कार्यों तक में बुआई से
कटाई तक में स्त्री योगदान देती है। किंतु कहा जाता है कृषि कार्य पुरुषों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा की बात करेंगे तो लड़के पढ़ाई करेंगे और लड़कियाँ पढ़ाई करने के साथ घरका खाना भी बनायेगी।
उन्होंने कहा कि पूर्व में नैतिक शिक्षा एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता था । जिसके माध्यम से सत्य , निष्ठा,कर्त्तव्यनिष्ठा, नैतिकता आदि बातें बतायी जाती थी । जिसके समाप्त होने से हम अपने सामाजिक मूल्य भूलते जा रहे हैं।अंत में धन्यवाद ज्ञापन मिशन शक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉ० विष्णु मिश्रा द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉक्टर सदानन्द राय ने तथा संचालन राजीव यादव ने किया ।
वेबिनार में प्राध्यापक डॉ
रंजना सिन्हा, डॉ० शिखा यादव, डॉ. दिग्विजय नारायन, सविता, किरन, धर्मेंद्र द्विवेदी, शैलजा त्रिपाठी, अभय राजपूत व डा० सुमन देवी के अलावा महाविद्यालय के छात्र- छात्रायें भी जुड़ी रही ।
