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मोतीमहल लान में 18वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला

लोकप्रिय मेले में चर्चित नई किताबें ढूंढ रहे पुस्तकप्रेमी बाल साहित्य से लेकर हर तरह का साहित्य है बुक फेयर में





सत्यबन्धु भारत

लखनऊ। मोती महल लॉन में चल रहे 18वें पुस्तक मेले के चौथे दिन साहित्यप्रेमियों की भीड़ रही। लोगों ने अपनी मनपसंद किताबें खरीदीं, बच्चों, युवाओं के अलावा महिलाओं की भी भीड़ बुक स्टॉलों पर खूब रही। दिन में मेले के मुख्य मंच पर साहित़्यिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन हुए। गोष्ठी, विमोचन और परिचर्चाओं का दौर देर रात तक चलता रहा।  पुस्तक मेले में साहित्य जगत में आई नई किताबों की इस बार लंबी फेहरिस्त है। जिसमें वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर नामवर की दृष्टि में मुक्तिबोध, नामवर की ही लिखी पन्नों पर कुछ दिन, देवेंद्रराज अंकुर की रंगमंच की कहानी कि याद जो करें सभी, शेष नारायण सिंह की शेष जी, मुकेश भारद्वाज की सत्ता के मोक्षद्वार, प्रभा खेतान की अपने-अपने चेहरे, अंजु रंजन की वो कागज की कश्ती सहित अन्य किताबें हैं।
वहीं राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर ममता कालिया का संस्मरण जीते जी इलाहाबाद, अंशुमान तिवारी की उल्टी गिनती, ज्ञान चतुर्वेदी का उपान्यास स्वांग, श्याम बिहारी श्यामल का लिखा जयशंकर प्रसाद पर केंद्रित कथा उपान्यास, सुजाता की पुस्तक नारीवादी निगाह से, ताराचंद नियोगी की लिखी नागार्जुन जीवनी युगों का यात्री, भगवानदास पोरवाल की खानजादा किताबें हैं। भारतीय पुस्तक न्यास के स्टॉल पर रश्मि कुमारी जलियांवाला बाग, कृष्णदत्त पालीवाल के प्रतिनिधि निबंध, स्वयं प्रकाश का कहानी संकलन, जसवीर मंड के लेखन व बलराम के अनुवाद में रामदेव धुरंधर की संकलित कहानियां पुस्तक, विमलेश कांति वर्मा व भावना सक्सेना का सरनामी हिन्दी का विश्व फलक पुस्तक और मणिरंजन की बिहार पुस्तक की बेहद मांग है।
राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के बुक स्टॉल पर मुकाबला जातीय इम्तिहानात, उर्दू अदब में मजमून का इर्तिका, उर्दू शायरी में कौमियत का तसव्वुर, रामपुर के फारसी गोशॉरा, तल्लफुज उर्दू उच्चारण किताबों की चर्चा है।    

 हिंदी वांग्मय साहित्य स्टॉल पर हमारा लखनऊ पुस्तक माला की लखनऊ पर केंद्रित पुस्तकें खूब पसंद की जा रहीं हैं। भारतीय पुस्तक न्यास के स्टॉल पर क्षमा शर्मा की मेरी फुटबाल, अमर गोस्वामी की चुनिंदा बाल कविताएं, अखिलेश श्रीवास्तव की दादी की दादी, लेखाराम की छोटे पौघे बड़े पौधे, मॉर्गरेट भट्टी की कहानी बुढिया की बाल पुस्तकें मौजूद हैं। सेतु प्रकाशन के स्टॉल पर प्रेमंचद का निर्मला, गोदान, हमारे राश्ट्रीय प्रतीक, जानो संविधान व बेटी की बात पुस्तकें हैं।

इसी तरह वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर जब लुटेरे इलायचीपुर आये, मेरी बड़ी किताब, अर्जुन और उसका गांव व पगलुदासु किताबें हैं। 

ऐसी ही बिसियों किताबें यहां मोती महल वाटिका लॉन राणा प्रताप मार्ग पर 10 अक्टूबर तक चलने वाले 18वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों के लिए मौजूद हैं। निःशुल्क प्रवेश वाले इस मेले में हर किताब में न्यूनतम 10 परसेंट की छूट मिल रही है।

-    यह हुए आयोजन

अखिल भारतीय अगीत परिषद की ओर से रंगनाथ मिश्र सत्य की अध्यक्षता व देवेश द्विवेदी देवेश के संचालन में चले काव्य समारोह में प्रो. वीजी गोस्वामी के गजल संग्रह एहसास का हमसफर का विमोचन हुआ। रामप्रकाश गुप्त, डॉ. श्याम गुप्त, डॉ. प्रवीण त्रिपाठी, डॉ. योगेश, मो. ओसामा, मंजू सक्सेना, कृपाषंकर, शीला वर्मा, प्रियांशु सहित अन्य ने प्रभावी रचनाएं पढ़ीं।

'हाइकु काव्य के हस्ताक्षर' परिचर्चा की अध्यक्ष डॉ विद्या विंदु सिंह, मुख्य अतिथि राजेंद्र वर्मा, विशिष्ट अतिथि  पवन कुमार जैन, मीनू खरे, सुरंगमा यादव, निवेदिताश्री थीं। विजय पुष्पम की वाणी वंदना से शुरु हुई परिचर्चा में अतिथि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। ज्योत्सना सिंह ने आभार जताया। 'काव्या सतत साहित्य यात्रा'  के काव्य समागम में अध्यक्ष कवयित्री मधु प्रधान, मुख्य अतिथि , कवि शिव मंगल सिंह'मंगल' व विशिष्ट अतिथि गजलकारा ज्योति सिन्हा,  संध्या सिंह व रचनाकार चंद्रशेखर वर्मा रहे। समागम में विजयराज श्रीवास्तव, मधु दीक्षित, बलवंत सिंह, मधु प्रधान, ज्योत्सना सिंह सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाकर प्रशंसा पाई। कविता गुप्ता 'काव्या' ने अतिथियों का आभार जताया, संचालन अलका प्रमोद ने किया। लेखक बालेंदु द्विवेदी के उपान्यास मदारीपुर जंक्शन और वाया फुरसतगंज पर विद्वानों ने चर्चा की। मेले में शाम को आयेाजित कार्यक्रम में अवधी रचनाकार रामबहादुर मिश्र, कथाकार मूसाखान अशांत बाराबंकवी, वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिंह, द्विव्यांश प्रकाशन के निदेशक नीरज अरोड़ा, आलोचक देवी प्रसाद तिवारी, वाणी प्रकाशन की कार्यकारी डायरेक्टर अदिति माहेश्वरी सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद हैं।
आज के कार्यक्रम  5 अक्टूबर 2021

पूर्वाह्न 11.00 बजे- युवा मंच की ओर आयोजन

अपराह्न 1.30 बजे- विनोद कुमार दीक्षित की कृति ‘मैं और मेरा संघर्ष व भगवान से मांगना नहीं लेना सीखो‘ का लोकार्पण

अपराह्न 1.30 बजे- अलका प्रमोद के काव्यसंग्रह ‘चेहरे की लकीरे‘ का लोकार्पण व उपन्यास चर्चा

शाम 5.30 बजे- वाणी प्रकाशन की ओर से पुस्तक चर्चा

शाम 6.30 बजे- राजकमल प्रकाशन की ओर से पुस्तकों का लोकार्पण