सत्यबन्धु भारत
बीघापुर, उन्नाव। भारत रत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 146 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर कस्बे की पंजीकृत सामाजिक संस्था माँ संदोही देवी सेवा समिति के तत्त्वावधान में विद्वान मनीषियों, अधिकारियों का सम्मान एवं अखिल भारतीय काव्य समारोह मन्दिर परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ महात्मा बुद्ध, सरदार पटेल व सरस्वती की प्रतिमाओं पर माल्यर्पण कर मुख्य अतिथि पूर्व
विधायक कृपा शंकर सिंह, विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत सदस्या लक्ष्मी पटेल व अध्यक्ष नगर पंचायत गोविंद नारायण शुक्ला के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में लेखकों में पाखण्डवाद, रूढ़िवाद, अन्धविश्वास, आडम्बरों के विरुद्घ लेखन करने वाले रघुराज सिंह मगन, अंग्रेजी व हिंदी दोनों ही भाषाओं में उपन्यास लिखने वाले सरस आज़ाद, अपनी कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली से अलग पहचान बनाने वाले बाल विकास एवं परियोजनाधिकारी अजय सिंह, पुलिस सेवा में अपनी न्यायप्रिता और कर्मठता से सबको आकर्षित करने वाले कोतवाली बीघापुर के प्रभारी निरीक्षक जे.बी. पाण्डेय व सामाजिक कार्यों में अपनी निःस्वार्थ्य भाव से सेवा देने वाले कस्बे के बड़े टेंट व्यवसायी रमेश कुमार राजा को संस्था ने सम्मानित किया ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जे.बी. पांडेय ने कहा कि कविता स्वतः स्फूर्त होती है जो मानव मन को ऊंचाईयां देती है।सी डी पी ओ अजय सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन सामाजिक सद्भाव बढ़ाते है।समिति द्वारा सम्मानित रघुराज सिंह मगन ने कहा कि सामाजिक
ताने बाने में सम्मान का अपना अलग स्थान है सम्मान सामाजिक सरोकारों की प्रेरणा देता है।-
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृपाशंकर सिंह एडवोकेट ने कहा की साहित्य प्रसूता बैसवारे की धरती से ही काब्य गोष्ठियों का प्रारंभ हुआ साहित्य आपसी भाई चारा बढ़ाते है।गोष्टी को सरस आज़ाद ने भी संबोधित किया।
कवि सम्मेलन का प्रारम्भ लखनऊ से पधारी कवियत्री डॉ. सुमन सुरभि की वाणी वंदना से हुआ उन्होंने पढ़ा
गुल गुलशन गुलफाम सरीखा देश हमारा, गिरधर शंकर राम सरीखा देश हमारा ।
उन्नाव जनपद के हास्य कवि राम किशोर वर्मा ने पढ़ा।
अउरि जब आगे मनई बनायो प्रभू ,
जेतने ढांचा पुराने मिटायो प्रभू ,
फरकु मनई का मनई तुरत कई सकै, अइस चेहरे मा सिस्टम लगायो प्रभू।
ओज, श्रृंगार के वरिष्ठ कवि सुरेस फक्कड़ ने पढ़ा
फटा कुर्ता फटी धोती पहन क्या खूब आया है कि जैसे बहते नाले में तरबूज आया है ,
दिखे जो पांच सालों बाद तो जनता लगी कहने बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है।
बाराबंकी से पधारे कवि विकाश बौखल ने पढ़ा
किसी ख़ंजर से न तलवार से जोड़ा जाए, सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए
ये किसि सख्श को दोबारा ना मिलने पाए प्यार के संग को आधार से जोड़ा जाए।
भोपाल से पधारे कवि अभिषेक अरजरिया ने काब्य पाठ करते हुए पढ़ा सियासत लाख चाहे पर होने कभी नहीं देंगे ,
दिलों के दरमियां कांटे कभी रोने नहीं देंगे, यहां सब साथ रहते हैं चाचा जुम्मन औ पंडित जी ,
जो है सद्भावना कायम उसे खोने नहीं देंगे।
डॉ गोविंद गजब ने पढ़ा
बचे न स्वाभिमानी तुम कहां अब मान जिन्दा है,
गालियां रोज पाते हो सम्मान जिन्दा है ,बोलते हो वही भाषा सियासत जो सिखाती है ,और उस पर ये तुर्रा है तुम्हारा मान जिन्दा है।
साहित्य वाटिका के संपादक ,कवि डॉ मान सिंह ने पढ़ा
असरदार सरदार था वो पटेल सरदार ,जिसे देख कर कांपते रहे सभी गद्दार।संचालन गोविन्द गजब अध्यक्षता चेयर मैन गोविन्द नारायण शुक्ल ने की।डॉ मन्ना, बाबू सिंह एडवोकेट आदि लोग मौजूद रहे।
