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हम फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले को ही बड़ा ज्ञानी मानते हैं: नागेंद्र सिंह चौहान



हिन्दी दिवस पर आज हिन्दी उत्थान की खूब बातें होंगी। हर शहर में छोटे-बड़े कार्यक्रम होंगे। हर साल यही होता है। कहीं एक सितंबर से पंद्रह सितंबर तक हिन्दी पखवाड़ा मनाया जाता है। कहीं पर सात सितंबर से चौदह सितंबर तक हिन्दी सप्ताह आयोजित होता है। बाकी हिन्दी दिवस तो 14 सितंबर को मनाया ही जाता है।

   हम लोग सितंबर महीने के 15 दिनों में ही अपनी राजभाषा को सुदृढ़ कर देते हैं। फिर हमें साल भर हिन्दी के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती है। पूरे साल हम अपनी गुलाम मानसिकता के अधीन होकर अंग्रेजी के गुणगान में जुटे रहते हैं। हम पूरे वर्ष भर हिन्दी को अंग्रेजी में लिखते हैं। आज की युवा पीढ़ी सोशल साइट्स पर अंग्रेजी अक्षरों की मदद से हिन्दी लिखती है। इसे शायद हिंग्लिश नाम दिया गया है। उन्हें लगता है कि हिन्दी में टिप्पणी करने से उन्हें पिछड़ा समझ लिया जाएगा। हम लोग खुद अपने बच्चों के हिन्दी लिखने-बोलने पर कुंठित हो जाते हैं। हमारे अंतर्मन में अंग्रेजी के लिए दीवानगी है।

   हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हम फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले को ही बड़ा ज्ञानी मानते हैं। भले ही उसे 'रटन्त अंग्रेजी' के सिवाय अन्य विषय की कोई जानकारी न हो। हम यहां अंग्रेजी पढ़ने, लिखने व बोलने का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम सबको अंग्रेजी सहित अन्य विदेशी भाषाएं सीखनी चाहिए। परन्तु, हमें अंग्रेजी में सोचने के बजाय हिन्दी में ही सोचना चाहिए। हमें अपनी हिन्दी को अधिक से अधिक बढ़ावा देना चाहिए। 

     देववाणी संस्कृत एवं हिन्दी ने संसार को जितना कुछ दिया है, उतना किसी अन्य भाषा ने नहीं दिया है। पूरी दुनिया में हिन्दी जैसी वैज्ञानिक भाषा कोई दूसरी नहीं है।  हमारी हिन्दी सबसे समर्थवान भाषा है। हिन्दी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के प्रति पूरे संसार में आकर्षण है। 

   बस, हमें हिन्दी में बहुत कुछ करने की जरूरत है। इसी से भारत के सभी राज्य ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य देश भी हिन्दी पढ़ने को उतावले होंगे। निकट भविष्य में हमारी हिन्दी विश्व की सम्पर्क भाषा बन जाए।...तो आओ हम सब हर दिन हिन्दी दिवस मनाएं।

आप सबको नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान की तरफ से हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई!

- नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

स्वतंत्र पत्रकार/समाजसेवी

जंगलवा, बीकेटी, लखनऊ।