
सत्यबन्धु भारत
आज़ादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयन्ती के अवसर पर शनिवार को स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान व लोक प्रशासन विभाग तथा पत्रकारिता व जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में एक राष्ट्रीय वेब-गोष्ठी का आयोजन किया गया.
कुलपति, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय को उनके जन्मदिन पर याद करते हुए उनकी ‘एकात्म मानववाद’
की विचारधारा की व्यापकता का उल्लेख किया. मानव से परिवार, परिवार से समाज, समाज से विश्व तक की सर्पिलाकार मंडलाकृति को ठीक ढंग से समझकर ही हम दीनदयाल जी के अखंड भारत के सपनों को साकार कर सकते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से उनके जुड़ाव और उनकी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि भारत की समस्याओं को विभिन्न वादों और विचारधाराओं के संकीर्ण उलझाव से नहीं दूर किया जा सकता.
पंडित जी के विचारों को भी बाद में उनके अनुयायियों ने वाद की शक्ल में तब्दील कर दिया. यह दिशा ठीक नहीं है.
प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जम्मू कश्मीर संबंधी संघर्ष को भी याद किया. साथ ही, उनकी असामयिक मृत्यु से उपजी शून्यता का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि आज पंडित जी के विचारों को अपनाकर ठीक ढंग लागू करने की आवश्यकता है और वादों की संकीर्णता से निकलकर देश की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ध्यान देने की ज़रूरत है.
स्नातकोत्तर
हिन्दी विभाग, मगध विवि के अध्यक्ष, मन्नुलाल केन्द्रीय पुस्तकालय, मगध विवि के प्रभारी तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रभारी प्रो. विनोद कुमार सिंह का आधार वक्तव्य तकनीकी कारणों से बाधित होता रहा. इस क्रम में पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार ने अपना संक्षिप्त वक्तव्य प्रस्तुत किया और दीन दयाल उपाध्याय के विचारों और संघर्षों के बारे में श्रोताओं को बताया.
स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. परम प्रकाश राय ने अतिथियों का स्वागत और परिचय प्रस्तुत किया. स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन विभाग की सहायक आचार्या डॉ. प्रियंका कुमारी ने सभी का आभार ज्ञापन किया. कार्यक्रम के समन्वयक और
मगध विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया और दीन दयाल उपाध्याय को प्रेरणास्रोत और प्रकाशस्तंभ के रूप में श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के आचार्य, सह-आचार्य, सहायक आचार्य, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। डॉ. दिव्या मिश्रा, डॉ. श्रद्धा ऋषि, डॉ. के के मिश्रा, डॉ. राकेश कुमार रंजन, डॉ. अम्बे कुमारी, डॉ. अजित सिंह, डॉ. त्रिपुरारी सिंह
आदि की सक्रिय मौजूदगी रही।
