अक्सर सुर्खियों में रहने वाली हरदोई जनपद के विकास खण्ड शाहबाद पर क्यों अधिकारी नही दे रहे ध्यान

सत्यबन्धु भारत। सन्दीप कुमार
हरदोई। जनपद की ब्लाक शाहबाद अक्सर सुर्खियों में रहती है जिसमें केंद्र सरकार की मनरेगा योजना के साथ इस तरह खिलवाड़ किया जाता है जैसे एक बच्चा किसी के साथ खेल रहा हो।
हरदोई जनपद के विकास खण्ड शाहबाद ही एक इकलौती ब्लॉक है जिसमे मनरेगा गाइडलाइन का कोई पालन नही होता क्योंकि जब ग्राम पंचायत स्तर ब्लॉक स्तर तक के अधिकारियों की सांठगांठ से ग्रामीण विकास कार्यों में मानकों को दरकिनार कर विकास को गर्त में पहुंचा दिया जाता है। लेकर हरदोई जनपद के अधिकारी भी इस और ध्यान देना उचित नही समझते। अभी कुछ दिन पूर्व ही सीडीओ हरदोई आकांक्षा राणा का ब्लॉक शाहाबाद में प्रोग्राम लगा था लेकिन ऐन वक्त पर प्रोग्राम
कैंसिल होना भी हर तरफ चर्चा बन गया।
ताजा मामला ग्राम पंचायत मिठिनापुर का है जहां 6 आरसीसी का कार्य पूर्व माह में प्रस्तावित हुआ था। मनरेगा योजना के अंतर्गत आईडी जेनरेट हो गईं। उसके बाद कार्य को करवाने के लिए टेंडर पड़ने थे लेकिन बिना टेंडर ही कार्य को प्रस्तावित कर ग्राम पंचायत में
धनराशि का आवंटन हो गया।
प्रश्न उठता है कि ग्राम पंचायत में हो रहे विकास कार्यों का भुगतान कार्य होने से पहले कैसे हुआ और किसके द्वारा किया गया?
जब इसकी गहनता से जांच की गई तो पता चला की तकनीकी सहायक के द्वारा अनुमानित लागत का एस्टीमेट तैयार किया जाता है जिसका बीडीओ के पोर्टल से स्वीकृत किया जाता है इसके बाद कार्य करवाया जाना चाहिए। परंतु शाहबाद ब्लॉक की ग्राम पंचायत मिठिनापुर सहित कई ग्राम पंचायतों ने कुछ उल्टा ही देखने को मिला। जहा केन्द्र सरकार की
गाइडलाइन के अनुसार कार्य होने के बाद एमबी होती है उसके बाद भुगतान होता है लेकिन शाहबाद की ग्राम पंचायतों में पहले भुगतान उसके बाद कार्य होता है जो नियमों के विपरीत है।
जब इस विषय पर मिठिनापुर के ग्राम प्रधान अभय प्रताप सिंह से बात हुई तो उनके द्वारा बताया गया की इतना पैसा किसके पास है कि वो अपने पास से पैसा लगाये और कार्य करवाए। इस विषय पर अधिक वार्तालाप होने पर प्रधान जी के द्वारा बताया गया की जब तक ब्लॉक के अधिकारियों को उनका
कमीशन नही जाता है तब तक उनके द्वारा एस्टीमेट ही नही बनाया जाता है इसलिए पहले सभी का कमीशन समय पर पहुंचने के बाद भुगतान होता है और उसके बाद कार्य करवाया जाता है।
बहीं गांव में बन रहे सीसी रोड में घटिया सीमेंट का प्रयोग करते हुए बिना रोड़ी डाले ही सीसी रोड बन रहे है। जिससे यही लगता है कि प्रधान,सचिव व ब्लॉक के अन्य जिम्मेदार खुलेआम सरकारी धन का
दुरुपयोग करते हुए अपनी जेबें भर रहे है।
ये तो सोचनीय है कि जब कार्य होने के बाद भुगतान होता था
तब तो कार्य में गुणवत्ता नही होती थी तो अब मीजरनमेंट बुक पर सभी मीजर फर्जी चढ़ा देने के बाद,फाइल को फीड करवाने के बाद क्या कार्य में कोई गुणवत्ता होगी?
