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सरकारी योजनाओं को प्रधान व सचिव लगा रहे पलीता,पेयजल के लिए जूझ रहे ग्रामीण

हैण्डपम्प मरम्मत व रिबोर के नाम पर लाखों का पेमेन्ट के बाबजूद बन्द पड़े हैण्डपम्प,बंध रहे जानवर




सत्यबन्धु भारत। सन्दीप कुमार

टोडरपुर,हरदोई। सरकार ग्रामीण विकास,स्वच्छता व ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लाख बादे व प्रचार-प्रसार करे लेकिन इन मूलभूत सुविधाओं से ग्रामीण आज भी कोसों दूर हैं।
सरकार द्वारा जारी ग्रामीण विकास के लिए अधिकांश धन प्रधान,सचिव से लेकर ब्लॉक के जिम्मेदारों में ही बंदरबांट हो जाता है। ग्रामीण विकास सिर्फ प्रचार-प्रसार तक ही सीमित रह गया है। 
ग्रामीण स्वच्छता के नाम पर सरकार ग्राम पंचायतों को लाखों रुपए हर साल आवंटित करती है इसके बाबजूद जिम्मेदार गांव की गलियां तक साफ नही करवा पाते।
पेयजल के नाम पर हैण्डपम्प मरम्मत व रिबोर के ग्रामपंचायतों में लाखों खर्च के बाबजूद स्वच्छ पानी ग्रामीणों को उपलब्धता से कोसों दूर है। कई हैंडपम्प तो ग्रामीण स्वयं सही कराते हैं लेकिन मरम्मत के नाम पर रुपए प्रधान व सचिव डकार जाते हैं।

इसी बंदरबांट को परिलक्षित करती हरदोई जनपद के ब्लॉक टोडरपुर की ग्राम पंचायत पेढ़वां है। 
जी हां, टोडरपुर की ग्राम पंचायत पेढ़वां में साफ-सफाई नदारद है। गालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। इसी गंदगी से सैंकडों बीमारियां ग्रामीणों की जिंदगी को बीमार बना रही हैं। लेकिन जिम्मेदार प्रधान जशोदा देवी,सचिव उमाकांत त्रिवेदी व बीडीओ टोडरपुर को इससे कोई मतलब नही।
टोडरपुर की ग्राम पंचायत पेढ़वां में हर ग्रामीण को स्वच्छ पेयजल मिले, इसके लिए लगभग 1,90,000 रुपए हैण्डपम्प मरम्मत व रिबोर के नाम पर अगस्त माह में बालाजी पाइप एंड मशीनरी स्टोर को पेमेन्ट होने के बाबजूद गांव में कई हैण्डपम्प खस्ताहाल में बंद पड़े हैं। जमीनी हकीकत देखने पर गांव में स्वच्छता को मुंह चिढ़ाती तस्वीरें देखी जा सकती हैं।
जहाँ एक और कई हैण्डपम्पों के चारों तरफ बजबजाती गंदगी में कीड़े-मकोड़े रेंगते दिखे, तो कई हैण्डपम्पों की चौकियां तक नही बनी। कई हैण्डपम्प एकदम बन्द पड़े दिखे। कई ग्रामीणों ने बताया कि अभी हाल में हैण्डपम्प की किसी प्रकार की कोई मरम्मत नही हुई। बहीं प्रधान प्रतिनिधि मरम्मत व रिबोर हैण्डपम्प दिखाने में असमर्थता जताते दिखे। आखिर जब इस बारे में सचिव से बात हुई तो उन्होंने बताया कि नल रिबोर व मरम्मत हुए हैं, गांव की साफ-सफाई की बात पूंछने पर सचिव ने प्रतिक्रिया दी कि आप भी नालियां व गालियों में झाड़ू लगाओ आकर मैं भी लगाऊंगा। बहीं खंड विकास अधिकारी टोडरपुर ने जानकारी न होने की बात कहते हुए डीपीआरओ से इस संदर्भ में बात करने की बात कही।
अब सवाल यह उठता है कि ग्रामीण जागरूकता व योजनाओं के प्रचार-प्रसार की कमी की बजह से जिम्मेदार सरकारी योजनाओं को खुलेआम जमकर चूना लगा रहे हैं। प्रतिक्रिया जानने पर पद का रुतबा दिखाने में भी पीछे नही रहते, आखिर जनता के सेवक ही इस तरह सरकारी धन का दुरुपयोग करेंगे तो ग्रामीण विकास कोसों दूर तो रहेगा ही।