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कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर नकुल सिन्हा डारेकटर मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ |
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डॉक्टर सरसु बाजपेई कार्डियोलोजिस्ट मेदांता हॉस्पिटल |
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प्रोफ़ेसर सुदीप कुमार डिपार्टमेंट कार्डियोलोज़ी एस जी पी जी आई लखनऊ |
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मधु तिवारी, लेखिका |
सत्यबन्धु भारत
हमारे शरीर में सबसे अहम हिस्सा ही हमारा दिल है ,आपका दिल या आपका हृदय अगर स्वस्थ है तो आप खुश और मस्त रहेंगे | हृदय संबंधी रोगों से बचने के लिए हमें लोगो को जागरूक करना होगा | जानकारी, जागरूकता , और मेडिकल कैंप भी लगाने होंगे| जागरूकता पैदा करने और हृदय संबंधित परेशानियों से बचने के लिए पूरे विश्व में हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस के रूप में मनाया जाता है | क्योंकि समाज में दिल की बीमारी से ग्रसित होने
वाले मरीज की संख्या बहुत बढ़ रहे हैं | इसलिए हमें जागरूकता की जरूरत है , विश्व हृदय दिवस मनाने की शुरुआत 2000 में की गई | आप हृदय रोग से ग्रसित हो जाते है यह पता नहीं चल पाता | जब समस्या उत्पन्न होने लगती है, तब हम मशवरा लेते हैं, फिर एकाएक पता चलता है कि आपको दिल की बीमारी है | दिल की बीमारी खतरनाक होती है | जान जोखिम में डाल सकती है | इसलिए हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए | हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए हमें नियमित व्यायाम करना चाहिए | व्यायाम करते समय हम खुद को और हृदय को स्वस्थ रख पाएंगे | इस आयोजन की पहल विश्व हृदय संघ के निर्देशक ने 1999 अटानी बेस
दे लूना ने डब्लू एच ओ के साथ मिलकर की थी | इसकी स्थापना लोगों को हृदय के विषय में जानकारी देने के लिए की गई थी | किस प्रकार वह अपने हृदय को स्वस्थ बना सकते हैं | किस प्रकार स्वास्थ्य जीवन की शैली को जी सकते हैं |
हृदय रोग :
ह्रदय रोगों में होने वाला यह एक सामान्य प्रकार का रोग है जिसका कारण कोलेस्ट्रॉल द्वारा उन दिनों पर एक दीवार जैसी संरचना को बना देता है | जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है परिणाम स्वरूप हृदय पीड़ा हृदयाघात अनियमित हृदय गति हो सकती है|
दिल से संबंधित कई प्रकार की
समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं|
आज आधुनिक दौर में इस भागती जिंदगी में हमारा खान-पान बहुत बदल चुका है | अगर हृदय स्वस्थ रखना है , व्यायाम की कमी ,धूमपान ,मादक द्रव्यों का सेवन, अत्यधिक वजन ,उच्च रक्तचाप ,मधुमेह आदि इसके खतरे बन सकते हैं | जिससे हृदय संबंधित होने वाली बीमारियां 80% मृत्यु का कारण बन सकती है |अपने को बचाने के लिए हमें अपनी समस्या को ,अपने परिवार और मित्रों को बताना चाहिए | डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए | जिससे उनके दिल या हृदय का इलाज हो सके | हम लोगों को मेडिकल कैंप लगाकर, पोस्टर लगाकर ,डिबेट करके ,जागरूकता अभियान चला सकते हैं|
डब्ल्यूएचओ नमक का प्रयोग कम से कम करने पर बल देता है जो कि प्रत्यक्ष तौर पर ह्रदय संबंधी रोगों का कारण बनता है | कम नमक और कम वसा वाला भोजन हम सब को ग्रहण करना चाहिए|
कुछ चीजों का ध्यान रखे
1बी एम आई का आंकलन करवाते रहें
2 रक्तचाप कोलेस्ट्रॉल की जांच कराए
3 सीढ़ियों के प्रयोग को बढ़ावा दें
4 दैनिक जीवन में पैदल ज्यादा चलें
5 ध्रुमपान
और मादक वस्तुओं का सेवन मत करें
6 ब्लड प्रशर और शूगर को कंट्रोल रखे
ग्लोबल हार्ट इनीशिएटिव के माध्यम से डब्ल्यूएचओ दुनिया भर में सरकारों को तीन तकनीकी पैक्जो के माध्यम से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज की रोकथाम और नियंत्रण के पैमानों पर प्रयासों का समर्थन कर रहा है | जीवन में छोटे-छोटे बदलाव आपको स्वस्थ और आपके दिल को स्वस्थ रख सकते हैं | न्यूट्रीशिव्स भोजन ,व्यायाम ,दिल को शक्तिशाली बनाता है | तनाव मुक्त रहना हमारे लिए बहुत जरूरी है, अगर हमें अपने दिल को स्वस्थ रखना है|
दिल से दिल का खयाल
डॉ नकुल सिन्हा जी ने बहुत अच्छी जानकारियों से अवगत कराया कि अपने दिल की सुनिए | विश्व हृदय दिवस ये तारीख 29 सितंबर वर्ल्ड फेडरेशन ने मुकर्रर की थी | दिल की नसों को बीमारियों से बचाइए| दिल की सुने, दिल शरीर का एक अहम हिस्सा है, दिल और दिमाग सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं | इसलिए हम सभी ये जान ले कि इसलिए दिल कभी सोता नहीं है ,जन्म से लेकर हर पल हर महीने हर वक्त काम करता रहता है | आपके बिना कहे ,आपको उसे याद ही दिलाना पड़ता | बहुत सारे न्यू ट्रेंस शरीर को पहुंचाता है ,दिल कभी आराम नहीं कर सकता निरंतर चलता रहता है | दिल कैसे
काम करता है ,दिल हमारी बात हमेशा सुनता है ,और उसी के अनुसार खुद को ढाल लेता है | मिनट मिनट घंटे घंटे वो यह जान लेता है कि हमारी जरूरत क्या है ,उसी के हिसाब से दिल की गति , दिल की पंपिंग घटती बढ़ती रहती है | हम सो रहे होते हैं ,हार्ट रेट कम हो जाता है ,पंपिंग भी धीमे-धीमे चलती रहती है | जब हम भाग रहे होते हैं या तेज कदमों के साथ चल रहे हैं ,बस पकड़ रहे हैं ,किसी घटना में फंस गए हैं ,घर में अचानक से परेशानी आ गई है ,तो हार्ट रेट बढ़ जाता है | दिल की पम्पिंग भी तेज हो जाती है | हमारी धड़कन बढ़ जाती है ,यह भी दिल को बताना नहीं पड़ता, वह पहले से ही जान लेता है | बचपन में हार्ट रेट 130,या 140 की गति से चलता है | जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं ,धीमा होता जाता है| हमें एडल्ट तक पहुंचने में बिना बीमारी के नॉर्मल व्यक्ति का 60 से 100 प्रति मिनट का होता है |यही रेंज हैं | हमारी जरूरत के अनुसार दिल की गति घटती बढ़ती रहती है| अगर अचानक से तेज हो जाए तो यह बीमारी भी मानी जाती है | हम हमेशा रिस्क फैक्टर का ध्यान रखे | यही समझदारी हैं |




