
भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को शांतिरक्षा से संबंधित दो महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकमत से स्वीकार किया. इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रेखांकित किया कि जब सुरक्षा और शांतिरक्षकों की बात होती है तब भारत वह करने में विश्वास रखता है जो वह कहता है.
सत्यबन्धु भारत
संयुक्त राष्ट्र . भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बुधवार को शांतिरक्षा से संबंधित दो अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकमत से स्वीकार किया है. इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (EAM S Jaishankar) ने रेखांकित किया कि जब सुरक्षा और शांतिरक्षकों की बात होती है तब भारत वह करने में विश्वास रखता है जो वह कहता है. सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष जयशंकर ने शांतिरक्षा पर ‘रक्षकों की रक्षा’ विषय पर एक खुली बहस की अध्यक्षता की.
बैठक के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के विरुद्ध अपराध की जवाबदेही’ पर प्रस्ताव और ‘शांतिरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी’ पर अध्यक्षीय वक्तव्य को स्वीकार किया गया जो इस विषय पर सुरक्षा परिषद में अपनी तरह का पहला दस्तावेज था. ‘संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के विरुद्ध अपराध की जवाबदेही’ पर प्रस्ताव का मसौदा भारत द्वारा तैयार किया गया था और इसे सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों द्वारा सह प्रायोजित किया गया. इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि युद्ध से शांति की ओर जाने वाले कठिन पथ पर बढ़ने के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक’ सबसे प्रभावी उपाय सिद्ध हुआ है.
जयशंकर ने कर्तव्य निर्वाह करते हुए अपनी जान गंवाने वाले शांतिरक्षकों को यहां संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के बाद यह बयान दिया. भारतीय विदेश मंत्री के साथ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस भी मौजूद थे. जयशंकर ने कहा, “ऐसे समय जब हम संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, युद्ध से शांति के मार्ग पर बढ़ने के वास्ते मेजबान देशों की सहायता के लिए यूएन के पास शांतिरक्षकों के रूप में सबसे प्रभावी उपाय मौजूद है.
भारत वर्तमान में सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है और इस नाते बुधवार को जयशंकर, ‘रक्षकों की रक्षा’ के विषय पर तकनीक और शांतिरक्षा पर खुली बहस की अध्यक्षता की. सुरक्षा परिषद, लगभग 40 साल में पहली बार, भारत की अध्यक्षता में शांतिरक्षा पर दो महत्वपूर्ण दस्तावेजों को स्वीकार्यता दी. जयशंकर ने कहा कि 1948 से अब तक दस लाख से ज्यादा शांतिरक्षकों ने संयुक्त राष्ट्र के झंडे के तले सेवा दी है. उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा एक विशिष्ट वैश्विक साझेदारी है. इसमें महासभा, सुरक्षा परिषद, सचिवालय, सेना और पुलिस तथा मेजबान देशों की सरकारें एक साथ आकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के लिए प्रयास करते हैं.”
जयशंकर ने कहा, “इसकी शक्ति यूएन चार्टर की वैधता तथा योगदान देने वाले देशों में निहित है जो कीमती संसाधन उपलब्ध कराते हैं.” गुतारेस ने कहा कि वह “आज शांतिरक्षा स्मारक पर शांतिरक्षकों के बलिदान का सम्मान करने के लिए” भारत को धन्यवाद देते हैं. उन्होंने कहा कि शांतिरक्षकों की सुरक्षा मजबूत करना उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के छः प्रमुख अंगों में से एक अंग है, जिसका उत्तरदायित्व है अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा बनाए रखना.
