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अन्ना मवेशियों के आतंक से किसान परेशान



सत्यबन्धु भारत 

उन्नाव। जनपद बीघापुर विकास खंड में नौ पशु आश्रय स्थल हैं जिनमें नगर पंचायत बीघापुर में बनी कान्हा गौशाला भी है। पांडेयपुर में बने पशु आश्रय स्थल में एक भी पशु नहीं है वहीं सैकड़ों अन्ना मवेशी किसानों की फसल को चौपट करने में लगे हुए हैं किसानों को बरसात के मौसम में भी खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। 

बीघापुर विकासखंड में पांडेपुर के पशु आश्रय स्थल मौराही नदी पुल के निकट बना हुआ है  लेकिन एक भी पशु पशु आश्रय स्थल में नहीं है वहीं सैकड़ों की तादाद में आवारा पशु किसानों की धान, मक्का,उर्द,मूँग की फसलें चट कर रहे हैं बेबस किसान  बरसात के मौसम में रात में भी पशुओं की रखवाली करने के लिए मजबूर है। खेतों में घूमते अन्ना मवेशी किसानों के लिए सिर दर्द है वही पशु आश्रय स्थल नवनिर्वाचित प्रधान व ग्राम पंचायत सचिवों कि आप रार में संचालित नहीं हो पा रहे हैं ।पुराने प्रधानों द्वारा पशुओं को खिलाया गया राशन का भुगतान वर्तमान प्रधान पुराने प्रधानों को  देने में आनाकानी कर रहे हैं । पशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अखिलेश सचान ने बताया कि बीघापुर पशु चिकित्सा केंद्र के अंतर्गत 9 पशु आश्रय स्थल संचालित हैं जिनमें नगर पंचायत स्थित बीघापुर की कान्हा गौशाला है जिसमें 120 पशु है । मगरायर पशु आश्रय स्थल में 92, रुद्रपुर में 60, पाली में 44,कुंभी में 73, पांडेयपुर में 46, रावतपुर में 46 ,मानपुर में 50 पशु आश्रय स्थलों में है  पांडेयपुर पशु आश्रय स्थल में एक भी मवेशी न होने पर उन्होंने बताया कि पांडेयपुर के निकट दूसरे पशु आश्रय स्थल में शिफ्ट कर दिए गए हैं पांडेयपुर की दूसरी गौशाला में भी मात्र 15 पशु ही है जबकि पांडेयपुर गौशाला में लिखा पढ़ी में 46 पशु है।

बीघापुर उन्नाव। पशु आश्रय स्थल पशुओं से ज्यादा पशु आश्रय चलाने वालों के लिए लाभप्रद सिद्ध हो रहे हैं जहां आश्रय स्थलों में बंद पशु चारे के लिए मोहताज हैं वही पशु आश्रय स्थल चलाने वाले भुगतान पाने के लिए रार मचाए हुए हैं ।पांडेयपुर गौशाला में 46 पशु बताये जा रहे हैं जबकि एक गौशाला में एक भी पशु नहीं है दूसरी गौशाला में लगभग 15 पशु ही बंद है, कागज में 46 दिखाए जा रहे हैं उन पशुयों के नाम से राशन की धनराशि भी निकाली जा रही है मौके पर सब कुछ सही दिखता हैं अधिकारी भी कोरम पूरा कर सब ठीक बताते है। किसान राजेंद्र सिंह, सोनू सिंह कुल्हा, बबलू शुक्ला नसीरपुर ने बताया कि पशु आश्रय स्थल केवल लूट के केंद्र बन गए हैं किसान बेबस होकर बरसात के मौसम में बड़ी-बड़ी घास के बीच में रहने को मजबूर है।