बिना रेडियोलॉजिस्ट के हो रहे अल्ट्रासाउंड

सत्यबन्धु भारत। अंकित वर्मा
कछौना,हरदोई कस्बे में इन दिनों प्रतिदिन सैंकड़ों मरीज अवैध पैथोलॉजी के जाल में फंसकर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। इस अवैध पैथोलॉजी के कारोबार में कस्बे व जिले के नामी-गिरामी पैथोलॉजी संचालक अवैध कारोबार में शामिल हैं। कोई कार्रवाई न किये जाने से इनके हौसले बुलन्द हैं। कस्बे व ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों की जिंदगी पूरी तरह ईश्वर के रहमो-करम पर निर्भर है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना के हाल-बेहाल है तो इसका फायदा उठाने के लिए कस्बे आधा दर्जन से ज्यादा संचालित पैथोलॉजी सेंटर उठाते हैं।
कस्बे में संचालित पैथोलॉजी सहित अन्य लैब और जांच केंद्र अब तक पूरी तरह ऑनलाइन नहीं हो सके। डॉक्टर व झोलाछाप डॉक्टर जिस सेंटर या लैब पर जांच की सलाह देते हैं, उसके अलावा दूसरी जगह की रिपोर्ट स्वीकार नहीं करते। वजह साफ है, डॉक्टर, लैब और जांच पैथोलॉजी संचालक जांचों के बदले मोटा कमीशन देते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पैथोलॉजी संचालक डॉक्टरों व झोलाछाप डॉक्टरों को 50 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन देते है। कस्बे में संचालित कुछ कलेक्शन सेंटर अधिकृत हैं, लेकिन मानक के मामले में सभी फेल है। इनमें से शायद ही किसी के पास वैध डिग्री हो, अधिकतर हाइस्कूल, इंटर पास लड़को से जांच का काम करवाया जा रहा है, खास बात यह है कि इस फर्जीवाड़े के खेल से विभागीय अधिकारी ही नहीं जिला प्रशासन भी बखूबी वाकिफ है। इसके बावजूद ऐसे पैथोलॉजी सेंटरों के विरुद्ध न तो कभी जांच की गयी है, और न ही इन पर नकेल कसने के लिये कोई कार्रवाई की गयी है। खुलेआम ऐसे अवैध पैथोलॉजी केंद्र संचालित किये जा रहे हैं, विभाग द्वारा समुचित कदम नहीं उठाए जाने से मरीज आये दिन इनका शिकार हो रहे हैं। कस्बे में एक सेंटर पर पैथोलॉजी जांच एवं बिना रेडियोलॉजिस्ट के धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड किये जाते हैं। इस पर आने वाले मरीजों से अवैध तरीके से मनचाहे रेट लिए जा रहे हैं। वही अल्ट्रासाउंड के लिए रिफर करने वाले प्रशिक्षित व अप्रशिक्षित डाक्टरों को मोटा कमीशन देते हैं। आशा बहुओं के काकस के चलते इस खेल का शिकार सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं हो रही हैं। यहां आने वाले मरीजों से प्रशिक्षित डॉक्टर बता कर जांच कर रहें है। स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी पूरी जानकारी है। कई बार जिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा इस सेंटर पर छापेमारी की गई है, परंतु खाऊ कमाऊ नीति के चलते अभी तक कार्यवाही नहीं हुई है।
