सत्यबन्धु भारत
उन्नाव। भाई-बहनों के अटूट प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व इस बार 22 अगस्त है। दुकानें राखियों से सज गई हैं और खरीददारी भी होने लगी है।
पिछले साल रक्षाबंधन के वक्त कोरोना संक्रमण की पहली लहर चरम पर थी। ऐसे में राखियों का कारोबार प्रभावित हुआ था। हालांकि इस बार कोरोना का प्रकोप कम है और बाजार इससे उत्साहित नजर आ रहा है। शहर के छोटा चौराहा, बड़ा चौराहा, गदन खेड़ा, कब्बा खेड़ा तथा क्षेत्रों में दही चौकी, बिछिया , मंगतखेड़ा, पुरवा, बीघापुर, अचलगंज, बांगरमऊ, शुक्लागंज, नवाबगंज मार्केट में राखियों की दुकानें सजी हुई हैं। दुकानों पर रखी सुंदर-सुंदर राखियां बहनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी है। फिलहाल भाइयों को डाक-कूरियर से भेजने के लिए खरीददारी अधिक है। बच्चों के लिए मोरपंखी, कार्टून, मोती- रुद्राक्ष, म्यूजिक और टेडी वाली राखियां खरीदी जा रही हैं। शहर में तमाम स्थानों पर अस्थायी दुकानें भी लगने लगी हैं।
व्यापारी सुमेर कुमार ने बताया कि कानपुर लखनऊ,दिल्ली,से राखियां आती हैं। मैटल में काफी आकर्षक राखियां हैं, जो खूब पसंद की जा रही हैं। पहले चाइनीज राखियां भी आती थीं, लेकिन अब सभी राखियां स्वदेशी ही हैं। फुटकर बिक्री शुरू हो चुकी है। साथ ही कस्बे और गांवों के दुकानदारर भी राखी ले जा रहे हैं। आनलाइन भी भेजी जा रहीं राखियां।
ई-कामर्स कंपनियों की वेबसाइट पर भी राखियां खरीदी जा रही हैं। इसमें थाली सेट भी है, जिसके दाम 300 रुपये से शुरू होते हैं। थाली में राखी, तिलक, चावल आदि होते हैं। कांबो पैक में चाकलेट भी हैं। बहनें आनलाइन भी थाली सेट भाइयों को भेज रही हैं।
