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2 महीने बाद 1 दिन में 46 हजार से ज्यादा नए कोरोना केस,यही है तीसरी लहर के संकेत?



सत्यबन्धु भारत

भारत में अप्रैल-मई में कोरोना वायरस (COVID-19) की खतरनाक दूसरी लहर के बाद जुलाई में केसों में कमी देखी गई थी, लेकिन अब सितंबर आते-आते मामले फिर बढ़ रहे हैं. 28 अगस्त को भारत में कोविड के 46,759 मामले सामने आए. ये पिछले दो महीने में एक दिन में दर्ज हुए सबसे ज्यादा मामले हैं. वहीं, ये लगातार तीसरा दिन है जब मामले 40 हजार से ऊपर जा रहे हैं.

कोरोना वायरस की तीसरी लहर की आशंका के बीच, भारत में मामले बढ़ रहे हैं. क्या ये तीसरी लहर की शुरुआती स्टेज है? दूसरे देशों का क्या हाल है?

दैनिक मामलों में बढ़ोतरी का कारण?

भारत में कोरोना वायरस के मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण केरल में बढ़ते मामले हैं. केरल में पिछले तीन दिनों से 30 हजार से ऊपर मामले सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय हैं. केरल में कोरोना के बढ़ते केसों को पर लगाम लगाने के लिए कुछ दिनों पहले केंद्र की एक टीम ने भी राज्य का दौरा किया था.

केरल में रोजाना आने वाले मामलों की संख्या ज्यादा है, हालांकि, राहत की बात ये है कि राज्य में मौतों का आंकड़ा कम है.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने केरल और महाराष्ट्र से बढ़ता संक्रमण संख्या वाले क्षेत्रों में रात के कर्फ्यू पर विचार करने को कहा है. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 28 अगस्त को नाइट कर्फ्यू लगाने का ऐलान किया. राज्य में 30 अगस्त से, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू रहेगा.

वहीं, महाराष्ट्र की बात करें तो राज्य में कोरोना कंट्रोल में आने के बाद अब एक बार फिर ये हाथ से बाहर निकलता दिख रहा है. राज्य में डेल्टा के बाद अब डेल्टा प्लस वेरिएंट के मामले सामने आ रहे हैं. महाराष्ट्र में एक हफ्ते के बाद 5 हजार कोरोना मामले दर्ज हुए है. महाराष्ट्र में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट से पहली मौत रत्नागिरि में दर्ज हुई थी. इसके बाद मुंबई शहर में इसी वेरिएंट से पीड़ित दूसरे मरीज की मौत हुई और अब रायगढ़ में एक 69 वर्षीय मरीज की मौत हुई है.

महाराष्ट्र में भी आने वाले दिनों में गणेशोत्सव, दही हांडी, दशहरा और दीवाली जैसे त्योहारों में अधिक सावधानी बरतने के लिए पाबंदियों पर फिर से विचार किया जाएगा. डॉक्टर्स, नर्सों के खाली पदों को भरने की भी तैयारी चल रही है.

'अक्टूबर में तीसरी वेव पीक पर होगी'

भारत में कोविड की दूसरी लहर के दौरान ही एक्सपर्ट्स ने तीसरी लहर की आशंका जता दी थी. जुलाई में आई SBI रिसर्च की 'कोविड -19: द रेस टू फिनिशिंग लाइन' में आशंका जताई गई थी कि कोविड की तीसरी लहर मध्य अगस्त तक शुरू हो सकती है और इसका पीक सितंबर में आ सकता है. इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में भारत में कोविड मामले लगभग 10,000 तक गिर सकते हैं, लेकिन अगस्त के दूसरे पखवाड़े तक संक्रमण बढ़ जाएगा.

भारत में अगस्त में कोरोना वायरस के मामले 25 से 35 हजार के बीच स्थिर बने हुए हैं. फरवरी में रोजाना मामले कम हो कर 10 हजार से नीचे आ गए थे, लेकिन दूसरी लहर के बाद ऐसा नहीं देखा गया है.

वहीं, गृह मंत्रालय के तहत आने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (NIDM) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत में तीसरी लहर का पीक अक्टूबर में देखा जा सकता है. प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO) को भेजी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तीसरी लहर के लिए तैयार रहना समय की मांग है.

स्कूलों में बच्चे हो रहे कोविड पॉजिटिव

कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद कई राज्यों ने स्कूलों को खोलने का फैसला लिया है. इसके बाद से अलग-अलग राज्यों से बच्चों के कोविड पॉजिटिव होने की खबरें सामने आ चुकी हैं.

आंध्र प्रदेश में 50 स्टूडेंट्स और 31 टीचर्स कोविड पॉजिटिव हो चुके हैं. मुंबई के एक बोर्डिंग स्कूल में 15 स्टूडेंट्स के कोविड पॉजिटिव आने के बाद बीएमसी ने स्कूल को सील कर दिया है. हरियाणा में स्कूल खुलने के बाद 6 स्टूडेंट पॉजिटिव पाए गए. पंजाब में 20 से ज्यादा स्टूडेंट्स कोविड का शिकार हो गए.


अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया और जापान का हाल

दुनिया के कई देशों में मामले एक बार फिर तेज गए हैं. अमेरिका में डेल्टा वेरिएंट हेल्थ एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है, तो वहीं, न्यूजीलैंड ने एक केस सामने आने के बाद देशभर में लॉकडाउन लगा दिया है.

जापान ने कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद 8 और जिलों में प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. न्यूजीलैंड में कोविड के नए मामले सामने आने के बाद लेवल 4 लॉकडाउन लगाया गया है, जिसके तहत लोग केवल ग्रॉसरी की शॉपिंग, मेडिकल और वैक्सीन लगवाने के लिए बाहर जा सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और सिडनी में कोविड के सबसे ज्यादा मामले देखे जा रहे हैं. सिडनी करीब नौ हफ्तों से लॉकडाउन में है. अमेरिका में रोजाना कोविड के एक लाख से ऊपर मामले देखे जा रहे हैं. इस नयी पीक के लिए डेल्टा वेरिएंट जिम्मेदार है. बड़ी संख्या में अपने नागरिकों का वैक्सीनेशन करने वाला इजरायल भी कोविड के बढ़ते मामलों से जूझ रहा है.