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जल्द आएगी कोरोना वैक्सीन की तीसरी बूस्टर डोज, केंद्र सरकार ने आइसीएमआर को सौंपी जिम्मेदारी



सत्यबन्धु भारत 

न्यूज़ डेस्क । कोरोना वायरस का संक्रमण डेढ़ साल से कहर बरपा रहा है। विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को उपयुक्त और कारगर मान रहे हैं। हालांकि, दूसरी लहर में वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी बड़ी संख्या में हेल्थ वर्कर संक्रमित हुए थे। इसे देखते हुए देश भर के फिजीशियन व माइक्रोबायोलाजिस्ट की प्रमुख संस्थाओं ने बूस्टर डोज लाने का सुझाव केंद्र सरकार की वैक्सीनेशन एक्सपर्ट कमेटी को दिया है। इस पर सरकार ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के साथ मंथन के बाद बूस्टर डोज का ट्रायल दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शुरू कराया है। जल्द ही कानपुर समेत देश के 12 सेंटरों पर भी ट्रायल होगा।

एक्सपर्ट पैनल ने दी अनुमति : भारत बायोटेक इंटरनेशनल ने कोवैक्सीन की बूस्टर डोज की अनुमति मांगी थी। उसमें कहा था कि अगर तीसरी डोज लगाई जाए तो कोरोना से बचाव की प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) लंबे समय तक विकसित हो सकती है। इस पर केंद्र सरकार के वैक्सीन एक्सपर्ट पैनल ने अनुमति दी। कोवैक्सीन के फेज टू क्लीनिकल ट्रायल यानी सितंबर-अक्टूबर 2020 में शामिल हुए वालंटियर्स पर ही बूस्टर डोज का ट्रायल होगा।

भारत बायोटेक ने डीजीसीआइ में किया आवेदन : एक्सपर्ट कमेटी से हरी झंडी मिलने के बाद भारत बायोटेक इंटरनेशनल ने बूस्टर डोज के क्लीनिकल ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (डीजीसीआइ) के यहां आवेदन किया। डीजीसीआइ से अनुमति मिलने के बाद मई अंत में एम्स दिल्ली में ट्रायल भी शुरू हो गया है। अब देश के उन सभी 12 सेंटरों पर ट्रायल होगा, जहां कोवैक्सीन का ट्रायल हुआ है।

छह माह होगी निगरानी : बूस्टर डोज लगाने के बाद वालंटियर्स की छह माह तक निगरानी की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि उनके शरीर में कोई बदलाव तो नहीं हो रहा है। कोरोना के खिलाफ एंटीबाडी घट या बढ़ तो नहीं रही हैं। कोरोना के नए-नए वैरिएंट से बचाव में उनकी इम्यूनिटी कितनी कारगर है। किसी तरह का साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा। इन सभी पहलुओं का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा।