
सत्यबन्धु भारत
न्यूज़ डेस्क अम्बेडकर नगर। जिले के तीन विकास खंडों में निर्विरोध निर्वाचन कराने के उपरांत लंबे चौड़े दावे करने वाले भाजपा नेताओं की हवा शनिवार को प्रमुख, क्षेत्र पंचायत का चुनाव परिणाम आते ही निकल गई। क्षेत्र चाहे विधायक का रहा हो, चाहे वह जिलाध्यक्ष अथवा जिला कमेटी के अन्य पार्टी नेताओं का, हर जगह भारतीय जनता पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। जलालपुर व टांडा के अलावा अकबरपुर में भी भाजपा की हार इतनी बुरी होगी, इसकी संभावना पार्टी नेताओं को भी नहीं रही होगी। इस हार से यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी नेताओं के दावे महज हवा हवाई हैं । धरातल पर उनके द्वारा कहीं भी कोई कार्य नहीं किया गया। बसखारी विकासखंड ,जो भाजपा के हाथ लगा है उसमें वहां से प्रत्याशी बनाए गए नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह का व्यक्तिगत योगदान है। कारण की संजय सिंह यहां से पूर्व में भी प्रमुख रह चुके हैं । इसके अलावा वह क्षेत्रीय लोगों में भी बेहद लोकप्रिय माने जाते हैं। टांडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक संजू देवी ने अपने खास चहेते तेजस्वी जायसवाल को टांडा से ब्लाक प्रमुख का उम्मीदवार बनाया था लेकिन तेजस्वी के तेज को बचाने में विधायक सफल नहीं हो सकी तथा उन्हें शर्मनाक हार झेलने को विवश होना पड़ा। जिला मुख्यालय पर स्थित अकबरपुर विकासखंड के लिए भाजपा ने आनन-फानन में निवर्तमान प्रमुख सुनीता वर्मा को पार्टी में शामिल करा कर उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया लेकिन सुनीता सपा प्रत्याशी देविका के सामने दूर दर तक नहीं टिक सकी। जिला मुख्यालय पर ही बैठ कर भाजपा के नेता लंबी चौड़ी रणनीति बनाने का दावा करते हैं लेकिन यहीं पर ही वह अपनी नाक बचाने में सफल नहीं हो पाए । आलापुर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी अनीता कमल की लोकप्रियता तो चुनाव के दौरान ही जाहिर हो गई थी जब उनकी सास व जेठानी बीडीसी के चुनाव में बुरी तरह हार गई थी । रामनगर विकासखंड के ही हथिनाराज गांव में भाजपा जिला अध्यक्ष मिथिलेश त्रिपाठी का भी घर है। वरिष्ठ नेताओं का गृह क्षेत्र होने के बावजूद भाजपा दोनों विकास खंडों को हार गई। जलालपुर विधानसभा क्षेत्र को जिला अध्यक्ष मिथिलेश त्रिपाठी ने अपना कर्म क्षेत्र बना रखा है साथ ही अब वह इसी विधानसभा क्षेत्र के निवासी भी बन गए हैं इसके बावजूद भाजपा का प्रत्याशी जलालपुर विकासखंड में केवल 33 मतों पर सिमट गया। प्रश्न यह उठता है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी के नेता किस प्रकार काम करते रहे कि उन्हें लगभग सभी विकास खंडों में बुरी हार का सामना करना पड़ा। जाहिर सी बात है कि अलग-अलग धड़ो में बंटी भाजपा जब तक एकजुटता का परिचय नहीं देगी तब तक चुनाव के परिणाम ऐसे ही आते रहेंगे । फिलहाल इसके बावजूद भाजपा नेता अपने किए पर इतराते रहेंगे। देखना यह है कि इस हार का ठीकरा किसके सिर पर फूटता है।
