
सत्यबन्धु भारत । अरुण शुक्ला
कोटवाधाम (बाराबंकी)। प्रेमी युगल की संदिग्ध दशा में पेड़ से लटके मिले शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शुक्रवार की दोपहर शव गांव पहुंचे। यहां पर प्रेमी का शव देखते ही दूसरे का होने की बात कहते हुए परिवारीजनों ने लेने से इंकार कर दिया।हालांकि सूचना पर दो थानों की पुलिस के साथ सीओ भी मौके पर पहुंचे और शव का अंतिम संस्कार कराने का दबाव बनाने लगे। मगर, परिवारीजनों ने युवक के वास्तविक शव लाने की बात पर अड़े रहे।
देर रात तक चले हंगामे के बाद कोई हल नहीं निकला तो परिवारीजन शव को मौके पर छोड़कर चले गए। इस घटना के चलते पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।
मामला दरियाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव का है। बृहस्पतिवार को गांव के ही एक किशोरी व उसके प्रेमी का शव गांव के बाहर संदिग्ध दशा में आम की बाग में लटकते हुए मिले थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार की दोपहर बाद दरियाबाद पुलिस गांव शव लेकर पहुंची।युवक के घर वालों ने चेहरा देखते ही शव अपने बेटे का न होने की बात कहते हुए लेने से इंकार कर दिया। अपने बेटे के शव की मांग को लेकर हंगामा शुरू हुआ। सूचना पर थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव की सील खुलवाकर परिजनों को पहचान करने को कहा।मगर, माता-पिता व ग्रामीणों ने शव अपने बेटे का होने की बात से इंकार कर वास्तविक शव को लाने की बात पर अड़ गए। ऐसे में पुलिस ने एक सिपाही को पोस्टमार्टम घर भेजकर जांच करने की बात कही। मगर, पोस्टमार्टम घर में मौजूद कर्मचारियों ने शव युवक (प्रेमी) का ही होने का दावा करती रही।
मृतक के भाई ने बताया पोस्टमार्टम हाउस में शव को सील करते समय वहां मौजूद कर्मचारियों से शव देखने की मांग की तो उन्होंने नहीं दिखाया। मृतक की मां ने बताया कि मृतक 17 वर्षीय था और कद काठी भी इस शव से मेल नहीं खा रही थी। युवक की मौत
के 24 घंटे भी नहीं बीते हैं। जबकि जो शव पुलिस सुपुर्द कर रही है।
उससे आ रही बदबू से वह काफी पुराना होने के साथ जला हुआ लग रहा है। जिसे पुलिस प्रशासन जबरन सौंप कर अपनी गलतियों को छुपाने में लगा है। उधर, मामले की गंभीरता को देख रामसनेहीघाट व टिकैतनगर पुलिस के साथ सीओ पंकज सिंह भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों को समझाने का प्रयास किया मगर वह अपनी बाद पर अडिग दिखे और दूसरे के शव को लेने से मना कर दिया। देर रात तक चले हंगामे के बाद कोई हल नहीं निकला तो परिवारीजन शव को मौके पर ही छोड़कर चले गए।
शव कई दिन पुराना होने के कारण परिजनों को संदेह हो रहा था। गर्मी के मौसम और शव झूलने से उसमें बदलाव आना स्वाभाविक है। ऐसे में परिजनों को समझाया गया है। वह शव लेने को तैयार हुए हैं। इसके बाद अंतिम संस्कार करा दिया जाएगा।
-पंकज सिंह, सीओ रामसनेही घाट
